तेहरान, 27 जून (वार्ता) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने गुरुवार को स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान के परमाणु ठिकानों को ‘भारी क्षति’ हुयी है।
यह बयान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और देश के अर्धसैनिक समूह, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के दावों के विपरीत है।
श्री अराग्ची ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी न्यूज के साथ साक्षात्कार में कहा कि परमाणु ठिकानों को ‘गंभीर नुकसान’ पहुंचा है और अब इस नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
उनका यह बयान श्री खामेनेई और आईआरजीसी के दावों के विपरीत है, जिन्होंने उन हमलों को मामूली बताया था।
उन्होंने कहा कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी को ईरान आने की अनुमति नहीं दी जायेगी। ईरानी संसद परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर होने पर विचार कर रही है।
विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों के मामले की समीक्षा की जायेगी। यदि वे क्षतिग्रस्त ठिकानों का आकलन करना चाहते हैं तो इसका अर्थ हैं कि वे परमाणु संयंत्रों को हुए नुकसान का आकलन करने के प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने यह युद्ध शुरू किया जबकि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को तैयार था। श्री अराग्ची ने पश्चिमी देशों की निंदा करते हुये कहा “उनकी मंशा हमारे परमाणु ठिकानों को नष्ट कर हमें बिल्कुल पंगु बनाना था और इसके बाद वे हमें यह कहते कि आओ, अब बातचीत करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”
