जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर वन विभाग व जेल विभाग में हुई भर्तियों में ओबीसी के उम्मीदवारों का रिजल्ट रोकने को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट को सुनवाई करने पर रोक लगाई है। इसी के मद्देनजर एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस मामले पर 22 सितंबर तक के लिये सुनवाई मुलतवीं कर दी है।
छतरपुर निवासी मुकेश कुमार प्रजापति, ग्वालियर निवासी जगमोहन सिंह, श्योपुर निवासी मातादीन मीना, विकास रावत व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं का चयन 87 प्रतिशत में जेल प्रहरी, क्षेत्र रक्षक तथा वन रक्षक में चयन हो चुका है। बिना कोई कारण बताए उनका रिजल्ट रोक दिया गया है।
उन्होंने बताया कि व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड ने साक्षात्कार भी आयोजित किया, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया। शासन की ओर से मामले की सुनवाई पर आपत्ति दर्ज कराई गई। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश ट्रांसफर याचिकाओं के सन्दर्भ में है, जिसका प्रभाव 21 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं को 13 प्रतिशत होल्ड नहीं किया गया है, बल्कि उनका रिजल्ट विदहेल्ड किया गया है।
