नयी दिल्ली 13 जून (वार्ता) प्रौद्योगिकी विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के अगले दो से तीन वर्षाें में स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे अधिक परिवर्तनकारी तकनीक के रूप में देखा जा रहा है जिसमें चालू वर्ष में डॉयग्नोस्टिक से जुड़े निर्णय लेने उसके कार्यान्वयन में विशेष रूप से उपयोग किया जा रहा है।
भारत में डिजिटल स्वास्थ्य रुझान 2025 रिपोर्ट जारी
डीएचएन दिल्ली फोरम 2025 में वार्षिक डिजिटल स्वास्थ्य रुझान और आउटलुक 2025 रिपोर्ट जारी की गयी है। इस कार्यक्रम में हेल्थकेयर उद्यमी, नीति निर्माता और भारतीय हेल्थकेयर के भविष्य को आकार देने वाले इनोवेटर की मौजूदगी में जारी नई रिपोर्ट में डिजिटल परिवर्तन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकार्ड आधुनिकीकरण और रणनीतिक सहयोग को अहम बताया गया है।
इस सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 54 प्रतिशत ने एआई को अगले 2-3 वर्षों के लिए स्वास्थ्य सेवा में सबसे अधिक परिवर्तनकारी तकनीक के रूप में मना है। 51 प्रतिशत से अधिक का कहना है कि यह मरीजों से जुड़ने के मददगार हो सकता है जिनमें से अधिकांश पहले से ही उपभोक्ता-सामना करने वाले डिजिटल उपकरणों में निवेश कर रहे हैं।
हालांकि कुछ लोगों ने बेहतर ख़तरा प्रबंधन के बावजूद, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और ऑडिट तत्परता में खामियाँ डिजिटल अपनाने में चल रही कमज़ोरियों की ओर भी ध्यान देने की बात कही। लगभग 60 प्रतिशत लोग तकनीकी साझेदारी को परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण प्रवर्तक के रूप में देख रह हैं, जो आंतरिक शोध एवं विकास और बाहरी परामर्श से भी आगे है।
रिपोर्ट के अनुसार 46 प्रतिशत ने माना कि बजट एक बड़ी बाधा बनी हुई है। डिजिटल स्वास्थ्य एजेंडा मुख्य रूप से सीआईओ और मुख्य डिजिटल अधिकारियों द्वारा संचालित होते हैं, जो स्वास्थ्य सेवा के भविष्य में आईटी की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करते हैं।

