ऑनलाइन दाखिला बना सिरदर्द, ऐप और सर्वर ने बढ़ाई मुश्किलें

सीहोर। कॉलेजों में ऑनलाइन एडमिशन के प्रक्रिया इस बार मजाक बनी हुई है. मोबाइल एप से रजिस्ट्रेशन में विद्यार्थियों को खासी परेशानी हो रही है. विद्यार्थियों का दावा है कि सर्वर डाउन रहने या लोड अधिक होने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ही नहीं हो पा रहे हैं. ई-प्रवेश प्रक्रिया में उच्चा शिक्षा विभाग द्वारा किया गया साफ्टवेयर बदलाव जिम्मेदारों के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

यही वजह है कि जिले में अब तक मात्र 10 फीसदी ही रजिस्ट्रेशन हो पाए हैं. विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के शेड्यूल में बदलाव किया है। इसके तहत पहले चरण की प्रवेश पक्रिया के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 6 जून तक होंगे। 13 जून से प्रवेश सूची के अनुसार फीस जमा कर विद्यार्थी आवंटित कॉलेज में एडमिशन ले सकेंगे. इसके साथ ही ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया के दूसरे चरण के रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे.

जिले के लीड कॉलेज में प्रतिदिन ई-प्रवेश प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर को लेकर 50 से 70 शिकायत आ रही है. इसे लेकर पीजी कॉलेज प्रबंधन परेशान है. इसके साथ ही ई-प्रवेश प्रक्रिया में जुटी टीम के सदस्य में भी इसे लेकर कॉलेज प्रबंधन को अवगत करा चुके हैं. उन्होंने बताया कि नए

सॉफ्टवेयर के कारण ई-प्रवेश प्रक्रिया धीमी हुई है. क्योंकि कई निजी कॉलेज पोर्टल पर दिखाई ही नहीं दे रहे. इसके कारण विद्यार्थियों को च्वाइस फिलिंग में परेशानी आ रही है. इसके साथ ही विद्यार्थियों को दस्तावेज अपलोड करने में दिक्कत आ रही है. यही वजह है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार कॉलेज में प्रवेश की पहली सूची 5 जून को जारी की जाना थी, लेकिन ई-प्रवेश के साफ्टवेयर में आ रही तकनीकी परेशानी के कारण दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में देरी हो रही है. इसके चलते उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अब 13 जून को कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया की पहली सूची जारी की जाएगी. कॉलेज के प्रोफसरों के अनुसार नए साफ्टवेयर में कई खामियां है. जैसे कॉलेज में दस्तावेज सत्यापन करने वाले अधिकारियों को त्रुटि सुधार करने का अधिकार नहीं है. कोई भी शिकायत आने पर भोपाल फोन लगाना पड़ता है.

न प्रशिक्षण दिया और न ही जिम्मेदार की नियुक्ति

कॉलेजों में पहले ई-प्रवेश की प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन के माध्यम से होती थी। इस वर्ष उच्च शिक्षा विभाग ने ई-प्रवेश की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने वाली एजेंसी में बदलाव किया है। इससे व्यवस्था में भी बदलाव हुआ। कॉलेजों में पहले यह प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन के माध्यम से होती थी। अब ई-प्रवेश की प्रक्रिया की जिम्मेदारी बैंगलुरू की एसआरआईटी कंपनी को दी है। संबंधित कंपनी द्वारा साफ्टवेयर पर काम करने वाले प्रोफेसरों को किसी प्रकार का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया। जो प्रशिक्षण दिया गया वह ऑनलाइन माध्यम से दिया गया, जो उचित नहीं है। यदि कंपनी द्वारा व्यवस्थित रुप से लीड कॉलेजों के प्रोफेसरों को साफ्टवेयर का प्रशिक्षण दिया जाता तो, वर्तमान स्थिति कुछ ओर रहती। इसके साथ ही संबंधित कंपनी द्वारा कॉलेज कैंपस हेल्प डेस्क लगाने की भी बात कही गई थी.

13 सरकारी कॉलेज में 9361 सीट, आवेदन 15 फीसदी

जिले में 13 शासकीय कॉलेज हैं. वहीं 35 से अधिक निजी कॉलेज संचालित हो रहे हैं. शासकीय कॉलेज में कुल 9 हजार 361 सीटें हैं जिन पर ऑनलाइन एडमिशन होना है. लेकिन यहां करीब 1150 विद्यार्थियों ने ही ऑनलाइन आवेदन किए हैं. इसमें से 900 विद्यार्थियों के भी दस्तावेज सत्यापित नहीं हो पाए हैं. यदि ऐसा ही रहा तो बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाएंगी. यही नहीं पिछले साल भी कॉलेजों में एडमिशन फुल नहीं हो पाए थे. कॉलेज में ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया की अंतिम तिथियों में बढ़ोत्तरी की गई है. इसके तहत पहले चरण के लिए रजिस्ट्रेशन 6 जून तक होंगे, जबकि प्रवेश के लिए लिस्ट 12 जून को जारी होगी. 13 जून से विद्यार्थी फीस जमा करके एडमिशन ले सकते हैं. दूसरे चरण के लिए रजिस्ट्रेशन 13 जून से 18 जून तक होंगे. 24 जून को प्रवेश सूची जारी होगी, जबकि 25 जून से 30 जून तक शुल्क जमा करके विद्यार्थी आवंटित कॉलेजों में प्रवेश ले सकते हैं.

 

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