ग्वालियर: कला मानव समाज को संवारती है और मानवता का संचार करती है। उक्त आशय के विचार संघ के वरिष्ठ नेता यशवन्त इंद्रापुरकर ने सदाशय मंच द्वारा आयोजित ‘ सितार की तरंग पर – मन के रंग ‘ विषयक एक दिवसीय त्वरित चित्रण कार्यशाला के समापन अवसर पर व्यक्त किये।
प्रख्यात सितार वादक स्वर्गी प्रमोद बापट और कला गुरु एल एस राजपूत की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में उनका स्मरण कराते हुए उन्होंने श्रीमती संध्या प्रमोद बापट के सितार वादन तथा राग-संगीत को रंगों में ढालने के कलाकारों के प्रयास की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने संगीत और चित्रकला के संयोजन वाले इस नवाचार की तारीफ की व कार्यक्रम आयोजित करने वाले धृतिवर्धन गुप्ता एवं संस्था के सदस्यों को बधाई दी।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्ति लेखा अधिकारी साहित्य एवं कला र्ममज्ञ डा. दिनेश पाठक ने कहा कि राग-संगीत और चित्रकला में अमूर्त चित्रण प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि यहां संस्कार भारती की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष डॉ संजय धवले भी मौजूद हैं और मैं अपेक्षा करूंगा कि उनके माध्यम से इस दिशा में बड़े पैमाने पर सशक्त परिणाम मूलक प्रयास किए जा सकेंगे। कला मात्र कलाकारों के बीच ही न रहे अपितु समाज में कलात्मक अभिव्यक्तियों को सशक्त कर सांस्कृतिक समृद्धता में वृद्धि कारक हो।
