
शाजापुर।नगर की ऐतिहासिक धरोहर प्राचीन किला दिन प्रतिदिन जर्जर होता जा रहा है. 400 साल से ज्यादा पुरानी नगर की किला रूपी भव्य अनमोल धरोहर वर्तमान समय में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है. किले की दीवारें जर्जर हो रही हैं, लेकिन इसकी सुध नहीं ली जा रही है. ऐसे में अनमोल धरोहर पर अभी भी ध्यान नहीं दिया तो ये विरासत इतिहास बन कर रह जाएगी. इसके दरवाजों के अवशेष भी गिरने लगे हैं जो कभी भी हादसों का कारण बन सकते हैं. शाजापुर का किला चीलर नदी पर बनाया गया ऐतिहासिक किला है. यह किला 2160 फीट लंबाई लिए हुए स्थित है. किले का मुख्य द्वार स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इसमें प्रवेश करने के तीन द्वार है. किले के मुख्य द्वार के अतिरिक्त उत्तर में हाथी दरवाजा, दक्षिण दिशा में ओंकारेश्वर मंदिर के पास ग्वालियर दरवाजा स्थित है.
कहा जाता है कि पहले शाहजहां ने इस किले का पुनरुद्धार करवाया. पश्चातवर्ती मराठा शासकों ने भी समय समय पर जीर्णोद्धार करवाया. यह किला 1640 ईसवी के पूर्व निर्मित होना माना गया है. किले की दीवारें मोटी है तथा उन पर बुर्जिया बनी है. जिन पर तोप एवं बंदूक रखने का स्थान है तथा परकोटे पर सैनिकों के आवाजाही के लिए स्थान है. किले के अंदर प्राचीन श्री राम व हनुमान मंदिर है. किले के आंतरिक भाग में गुप्त सुरंग है.
12 साल पहले टूटी थी दीवार
बड़ी व ऊंची दीवारों से घिरा यह किला समय के साथ जर्जर हो रहा है. इसकी दीवारें कई जगह से टूट रही हैं परकोटे भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. करीब 12 वर्ष पूर्व इस प्राचीन विरासत की दीवार का एक बड़ा हिस्सा चीलर नदी में गिर गया था इसके बाद यहां पर पुरातत्व विभाग की टीम ने पहुंचकर इसका सर्वे किया और किले की दीवार की मरम्मत करवाने की बात कही थी।
इनका कहना है
नगर के भीतर स्थित चारों दरवाजे व किला शहर की पुरानी पहचान है. जिन्हें संरक्षित किया जाना आवश्यक है. काफी मजबूत होने के बावजूद समय के साथ इनकी मरम्मत जरूरी है.इस संबंध में योजना बनाकर शीघ्र इनका सुधार करवाया जाएगा.
अरूण भीमावद, विधायक, शाजापुर
