पहले बरसे ओले फिर झमाझम बारिश के चलते पारा लुढ़का

सीहोर।मई माह के पहले सप्ताह में मौसम में आए बदलाव ने भीषण गर्मी की हेकड़ी निकाल दी है. सोमवार को दोपहर में जोरदार धूल भरी आंधी चलने के बाद कुछ देर ओले बरसे. कुछ अंतराल की खामोशी के बाद बादल बरस पड़े. इस दौरान काफी तेज रफ्तार में बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया था. तापमान में आई गिरावट के चलते भीषण गर्मी से बेहाल लोगों को काफी राहत मिली.

चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी का सामना कर रहे नागरिकों के लिए मई माह का आगाज राहतकारी साबित हुआ है. बीते तीन- चार दिन से मौसम में आ रहे बदलाव के चलते लोगों को दिन भर तीखी धूप झेलना पड़ रही है तो शाम होते ही आसमान पर काले घनेरे बादलों का जमावड़ा हो जाता है. रविवार को शाम से मौसम ने करवट ले ली थी. रात तक रह- रहकर बूंदाबांदी होती रही और तेज हवाओं का दौर बना रहा था. देर रात में तो मानो तूफान सा आ गया. बारिश भले ही कम हुई, लेकिन हवाओं की रफ्तार इतनी तेज थी मानो सब कुछ उड़ाकर ले जाना चाह रही हों. इस दौरान भयावह ढंग से बादल गरज रहे थे और बिजली की चकाचौंध दिन सा उजाला कर रही थी. तेज हवाओं के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ गिरने की जानकारी मिली है तो शहर के सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर लगा लोहे का वजनी प्रवेश द्वार भी जमींदोज हो गया.

सोमवार को भी सुबह से आसमान पर बादलों की अठखेलियां जारी थीं, लेकिन दोपहर में डेढ़ बजे के बाद अचानक ओलों की बरसात शुरू हो गई. ज्यादातर क्षेत्रों में चने के आकार के ओले गिरे तो कहीं- कहीं ओलों का आकार बड़ा भी था. लगभग पांच मिनट तक ओले बरसते रहे. कुछ देर के अंतराल के बाद जोरदार बारिश शुरू हो गई. तेज हवाओं के बीच बरस रहे पानी ने शहर को तरबतर कर दिया. लगभग आधा घंटे तक जोरदार पानी बरसने से मौसम सुहावना हो गया, लेकिन सड़कों पर जगह- जगह पानी जमा हो जाने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इस दौरान बिजली गुल रहने के कारण भी लोग परेशान हुए. शहर के कई हिस्सों में तो रात में चार से पांच घंटे तक अंधेरा छाया रहा.मंडी, भोपाल नाका, बस स्टैंड एरिया में विद्युत व्यवस्था प्रभावित रही.

नगर का प्रवेश द्वार हुआ धराशायी

रविवार की देर रात मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया था. हवाओं की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रतिघंटा बनी हुई थी. इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर पेड़ गिरने के समाचार मिले हैं. इसके अलावा शहर के सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर बना प्रवेश द्वार भी जमीन पर आ धराया. गनीमत रही कि रात के वक्त यह हादसा हुआ. अगर दिन में यह गिरता तो भारी जनहानि की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता था.

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