
इंदौर।शराब घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने रावजी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर 172/2017 के आधार पर जांच तेज कर दी है। ईडी ने आबकारी विभाग की आंतरिक जांच के आधार पर शराब ठेकेदारों से वसूली गई राशि का विवरण, उनके बैंक खातों की जानकारी और जांच की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी है।
12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। आरोप है कि शराब ठेकेदारों ने फर्जी चालान जमा किए और आबकारी विभाग के अफसरों ने तीन साल तक इनकी जांच नहीं की। इस मामले में सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे सहित छह अफसरों को निलंबित किया गया था। जांच के बाद भी 1700 करोड़ रुपये के शराब चालानों की जांच का नतीजा शून्य ही रहा।
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इन लोगों को आरोपी बनाया गया था,
शराब ठेकेदार एमजी रोड समूह के अविनाश और विजय श्रीवास्तव, जीपीओ चौराहा समूह के राकेश जायसवाल, तोप खाना समूह के योगेंद्र जायसवाल, बायपास चौराहा देवगुराड़िया समूह के राहुल चौकसे, गवली पलासिया समूह के सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, लवकुश और प्रदीप जायसवाल।
