उज्जैन: कलेक्टर कार्यालय से जुड़े दर्जनों सरकारी विभागों में 25 से ज्यादा गाड़ियां ट्रेवल्स संचालकों की अटैच है, नए कलेक्टर के आने पर पता चला कि ईंधन की मात्रा लगातार बढ़ रही है. लाखों रुपया बकाया हो चुका है, ऐसे में अब जिम्मेदारों में हड़कंप मचा है कि इस तरह तो यात्रा भारी पड़ रही है!सम्राट विक्रमादित्य संकुल भवन से लेकर दूसरे सरकारी विभागों में 25 से अधिक गाड़ियां दौड़ रही है. जिनमें निजी ड्राइवर को रखा गया है, और यह सभी गाड़ियां भी निजी ट्रैवल संचालक द्वारा ही अटैच कराई गई है.
19 हजार 500 सरकारी रेट
सरकारी कार्यालय में जो कार अटैच किए जाने का प्रावधान है उसमें सबसे ज्यादा बोलेरो गाड़ी अटैच की जाती है. अधिकारियों को बोलेरो का ही पॉवर दे रखा है, जिसका रेट 19500 है, मासिक तौर पर यही शुल्क अधिकार तौर पर जारी किया जाता है बावजूद इसके मनमाना दाम वसूला जा रहा है.
40 हजार का थमा रहे बिल
कुछ निजी ट्रैवल संचालकों से लेकर ड्राइवरो सहित पेट्रोल पंप संचालकों की मिली भगत से कलेक्टर कार्यालय पर घपले घोटाले सतत जारी है. नए कलेक्टर के आने के बाद ऐसे जिम्मेदारों में हड़कंप मचा है, जो निजी ट्रैवल संचालकों और ड्राइवर के साथ मिलकर चूना लगाने में जुटे हैं. बताया जा रहा है कि 19 हजार 500 के बजाय 30-35 और 40 हजार तक के बिल लगाए जा रहे हैं!
इनोवा क्रिस्टा की डिमांड
कलेक्टर कमिश्नर व अन्य आईएएस व कुछ और बड़े अधिकारियों को छोड़ दे तो बाकी अन्य अधिकारियों के लिए बोलेरो या उसके समकक्ष वाहन की ही प्रशासनिक अनुमति गाड़ी अटैच करने के लिए होती है, बावजूद इसके कुछ अधिकारी अपना रसूख़ दिखाने के लिए इनोवा क्रिस्टा से कम की डिमांड नहीं कर रहे हैं.
