भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी त्रैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा करने के बाद रेपो रेट में कमी की है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में तत्काल प्रभाव से 0.25 फीसदी की कटौती का फैसला सर्वसम्मति से लिया है.दरअसल आरबीआई ने लगातार दूसरी बार प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती का एलान किया है.केंद्रीय बैंक के इस फैसले से अमेरिका की ओर से लगाए गए पारस्परिक शुल्कों से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद बढ़ी है. ब्याज दरों में कटौती के बाद प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट घटकर 6 प्रतिशत हो गई. इस कदम से आवास, ऑटो और कॉर्पोरेट ऋण लेने वालों को राहत मिली. यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है. इसका कारण यह है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत सहित 60 देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, यह घोषणा 9 अप्रैल से प्रभावी है. अमेरिका ने भारत के झींगा, कालीन, चिकित्सा उपकरणों और सोने के आभूषणों सहित विभिन्न उत्पादों पर 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाया है. यह 26 प्रतिशत शुल्क अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले मौजूदा शुल्क के अतिरिक्त है. अमेरिका के इस कदम से खास तौर पर निर्यात के मामले में भारतीय उत्पादकों के समक्ष बहुत बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है. इस वजह से बाजार में भय व्याप्त है. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कमी करके बाजार को राहत देने की कोशिश की है. यह ध्यान रखना होगा कि जब भी रेपो रेट कम होता है तो कर्ज सस्ते होते हैं. जब कर्ज सस्ते होते हैं तो बाजार में तरलता बढ़ती है. तरलता बढ़ती है तो मुद्रा का प्रवाह गतिमान रहता है जिसका लाभ अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिलता है. इसी के साथ वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास अनुमान को भी 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.5
कर दिया है. यह अनुमान घटा जरूर है, लेकिन इतना कम नहीं हुआ है,कि बहुत चिंता की जाए. बहरहाल, उम्मीद है कि आरबीआई के इस कदम से बाजार को स्थिरता मिलेगी और निर्यातकों को इस नई आर्थिक चुनौती से निपटने की शक्ति मिलेगी.
रेपो दरों में कटौती होने से यदि कर्ज की दरों में कमी आती है तो इससे भारतीय बाजार में वस्तुओं की मांग बढ़ेगी. यही कारण है कि इसे एक समयोचित निर्णय माना जा रहा है.
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय से खुदरा बाजार में महंगाई पर नियंत्रण लगा है. सब्जियां, फलों और अनाज की कीमतों में लगाम लगी है. इससे खुदरा महंगाई दर कंट्रोल में आई है. तभी से अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई रेपो दरों में कटौती कर सकता है.
और उम्मीद के अनुसार आरबीआई ने पहले फरवरी में और अब अप्रैल में लगातार दो बार रेपो दरों में कटौती की है. निश्चित रूप से ब्याज दरों में कमी से बाजार में खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी. ईएमआई के कम होने से ग्राहकों को महंगाई की मार से बचाने और बचत को दूसरी वस्तुओं की खपत में लगाने में मदद मिलेगी. जाहिर है वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में घरेलू मांग बढ़ाने के लिए यह कदम लाभकारी साबित हो सकता है. कुल मिलाकर भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट घटाने के फैसले से यह जाहिर होता है कि देश का सर्वोच्च नीति निर्धारक बैंक और केंद्र सरकार अमेरिका द्वारा उत्पन्न की गई नई चुनौतियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं.
