उजड़ गई आरईएस द्वारा चंदरेह में बनाई गई लाखों की वाटिका एवं ईको पार्क

० खनिज प्रतिष्ठान मद से हुआ फिनसिंग व पक्के निर्माण का कार्य एवं मनरेगा मद से वृक्षारोपण का हुआ कार्य

नवभारत न्यूज

सीधी/रामपुर नैकिन 17 फरवरी। आरईएस द्वारा चंदरेह में बनाई गई लाखों की वाटिका एवं ईको पार्क देखरेख के अभाव में उजड़ गई। खनिज प्रतिष्ठान मद से फिनसिंग व पक्के निर्माण का कार्य एवं मनरेगा मद से वृक्षारोपण का कार्य हुआ था।

बताते चलें कि प्रसिद्ध चंदरेह शिव मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिये आरईएस विभाग को आवश्यक कार्यों को कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खनिज प्रतिष्ठान मद से लगभग 12 लाख रूपये एवं मनरेगा से लगभग 5 लाख वाटिका एवं ईको पार्क के लिये स्वीकृत किये गये थे। आरईएस विभाग द्वारा आनन-फानन में निर्माण कार्य चंदरेह मंदिर परिसर में शुरू किये गये पर्यटकों के लिये मंदिर परिसर में वृक्षारोपण कराते हुये कई औषधीय एवं महत्वपूर्ण पौधों का रोपण कराया गया। उस दौरान आरईएस द्वारा खूब प्रचारित किया गया कि पर्यटकों के लिये चंदरेह मंदिर परिसर में वाटिका बनाई गई है। इसमें औषधीय महत्व से जुड़े विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों का रोपण कराया गया है। यह कार्य मनरेगा मद से कराया गया था।

जानकारों का कहना है कि आरईएस विभाग के पूर्व चर्चित कार्यपालन यंत्री हिमांश तिवारी द्वारा जो कार्य कराये गये थे मौके पर उनका भले ही उतना वजूद न रहा हो लेकिन प्रचार-प्रसार करने में उनके द्वारा कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गई थी। बाद में वृक्षारोपण तो किया गया लेकिन पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी को नहीं सौंपी गई। लिहाजा रोपित किये गये पौधे कुछ समय बाद ही मुरझा कर नष्ट हो गये और लाखों की लागत से बनाई गई वाटिका पूरी तरह से उजड़ गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि यहां जो भी पर्यटक पहुंचते हैं उन्हें प्रसिद्ध चंदरेह मंदिर के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता। जो वाटिका बनाई गई है उसमें वृक्ष न होने से वह वीरान नजर आती है। विडम्बना यह है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य होने के बाद भी मौके पर क्या स्थिति है इसको जानने की जरूरत किसी जिम्मेदार ने नहीं समझी। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिये चंदरेह मंदिर परिसर में जो भी कार्य हुये थे वह अब भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं।

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देख-रेख की किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी

प्रसिद्ध चंदरेह शिव मंदिर परिसर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिये आरईएस विभाग द्वारा लाखों की लागत से वाटिका को बहुमूल्य और औषधीय वृक्षों से सजाया गया था। वाटिका में पौधों का रोपण होने के बाद उसकी सुरक्षा करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। हैरत की बात तो यह है कि वाटिका में रोपित किये गये पौधों के देखरेख के लिये किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली, लिहाजा वाटिका उजड़ गई।

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पूर्व विधायक के चहेतों ने किया था कार्य

विधानसभा क्षेत्र चुरहट के प्रसिद्ध चंदरेह शिव मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विक सित करने की कार्ययोजना जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई थी। उस दौरान बजट का आवंटन खनिज प्रतिष्ठान मद एवं मनरेगा से किया गया था। कार्य कराने की जिम्मेदारी आरईएस विभाग को सौंपी गई थी। जानकारों का कहना है कि पूर्व विधायक शरदेन्दु तिवारी के चहेते ठेकेदार द्वारा समूचा निर्माण कार्य कराया गया था। जिसमें आरंभ से गुणवत्ता की कमी बनी थी।

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इनका कहना है

ग्राम पंचायत चंदरेह में बनी वाटिका का कार्य मेरे कार्यकाल में नही हुआ है। जहां तक मुझे जानकारी है कि उक्त कार्य आरईएस विभाग द्वारा कराया गया था। इसमें कितनी लागत लगी है रिकॉर्ड देखकर ही बता सकता हूं। जहां तक देख-रेख की बात है तो आरईएस विभाग कार्य करने के बाद अभी तक वाटिका ग्राम पंचायत को सुपुर्द नही की गई है। जिसके कारण ग्राम पंचायत वहां की देख-रेख नही कर रही है।

बसंत मिश्रा, सचिव ग्राम पंचायत चंदरेह

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