मुंबई 07 फरवरी (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विभिन्न वित्तीय बाजार खंडों में कारोबार और निपटान समय की व्यापक समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में लिए गये निर्णयाें की जानकारी देते हुये शुक्रवार को कहा कि विभिन्न वित्तीय बाजार खंडों में कारोबार और निपटान समय की व्यापक समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि समकालिक और पूरक बाजार समय से मूल्य खोज की दक्षता और तरलता आवश्यकताओं में सुधार हो सकता है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि हाल के वर्षों में कारोबार का इलेक्ट्रॉनिकीकरण बढ़ा है। विदेशी मुद्रा और कुछ ब्याज दर डेरिवेटिव बाजार चौबीस घंटे पांच दिन आधार पर उपलब्ध हैं। घरेलू वित्तीय बाजारों में प्रवासियों की भागीदारी बढ़ी है और भुगतान प्रणालियां चौबीस घंटे सात दिन उपलब्ध हो गई हैं। इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने हितधारकों के प्रतिनिधियों के साथ एक कार्य समूह गठित करने का निर्णय लिया है, जो इन पहलुओं की गहन समीक्षा करेगा।
उन्होंने कहा कि यह कार्य समूह 30 अप्रैल, 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इसके आधार पर कारोबार और निपटान समय में संभावित सुधार किए जाएंगे।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम-ऑर्डर मैचिंग (एनडीएस-ओएम) सरकारी प्रतिभूतियों के द्वितीयक बाजार लेनदेन के लिए एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में इसकी पहुंच केवल विनियमित संस्थाओं, बैंकों और स्टैंडअलोन प्राथमिक डीलरों के ग्राहकों तक सीमित है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि सरकारी प्रतिभूति बाजार में भागीदारी बढ़ाने और पहुंच का दायरा विस्तृत करने के लिए आरबीआई ने पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ पंजीकृत गैर-बैंक ब्रोकरों को भी अपने ग्राहकों की ओर से सीधे एनडीएस-ओएम तक पहुंचने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। ये ब्रोकर रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करते हुए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।
