चेन्नई (वार्ता) उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा है कि दिव्यांग और बहु-दिव्यांग लोगों की मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य सहायक तकनीकों का उपयोग करने का समय आ गया है।
श्री धनखड़ ने यहां ईसीआर के उपनगरीय मुत्तुकाडु में राष्ट्रीय बहु-दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में शिक्षा, सुगम्यता और कल्याण के लिए वकालत पर बधिर-अंधे के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि एक मूल्यवान संसाधन यानी जहां दिव्यांग लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं उनकी मदद के लिए एआई और अन्य सहायक तकनीकों का उपयोग करने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि समावेशी सरकार और विकसित भारत का उद्देश्य दिव्यांगों की भागीदारी के बिना संभव नहीं है।
श्री धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिव्यांगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मिशन मोड में प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की क्षमता और प्रतिभा का दोहन करने तथा उनके सपनों को साकार करने के लिए पिछले दस वर्षों में कई नीतियां और कार्यक्रम लागू किए गए हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगों की मानवीय भावना को दबाया नहीं जा सकता क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विजयी होते हैं। उन्होंने कहा, ”यह कठिन भावना पैरा ओलंपिक में भारतीय पैरा ओलंपिक एथलीटों के प्रदर्शन से स्पष्ट हुई जहां उन्होंने रिकॉर्ड संख्या में पदक जीते।”
उन्होंने कहा कि समाज को दिव्यांगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे समुदाय में अलग-थलग न रहें। बाद में उपराष्ट्रपति ने दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण और उपकरण वितरित किए। इससे पहले उन्होंने एनआईईपीएमडी (दिव्यांगजन) शिविर में ‘धरती माता’ के प्रतीक के रूप में ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम के तहत पौधे लगाए तथा दिव्यांग बच्चों से बातचीत की।
देश की द्वितीय महिला डॉ. सुदेश धनखड़ ने एनआईईपीएमडी के निदेशक डॉ. नचिकेता राउत को सम्मानित किया।
सम्मेलन में बधिर-अंधे वयस्कों को प्रभावी बातचीत के लिए एक ही मंच पर एकत्रित किया गया। जिसके माध्यम से समुदाय के रोजगार अवसरों और आत्म-वकालत के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके।
एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि एनआईईपीएमडी भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तहत एक स्वायत्त निकाय है जिसका उद्देश्य बहु-दिव्यांगता वाले लोगों की सेवा करना है ताकि उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके और परिवार-केंद्रित दृष्टिकोण चिकित्सीय तकनीकों के माध्यम से समावेश को प्रोत्साहित किया जा सके।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसका लक्ष्य समाज में संपन्न विकलांग लोगों के जीवन को सशक्त बनाने के लिए समान अवसर प्रदान करना है।
