यासीन मलिक की जम्मू में पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा देने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने 1989 के रुबैया सईद अपहरण और 1990 के श्रीनगर गोलीबारी मामलों के आरोपी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक की वर्चुअल पेशी के लिए जम्मू की संबंधित विशेष अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का सोमवार को निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को यह निर्देश दिया।

पीठ विशेष अदालत की सुनवाई में मलिक के वर्चुअल रूप से भाग लेने के लिए उचित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया। साथ ही दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (टेक्नोलॉजी) को यह भी जांच परख के लिए कहा कि तिहाड़ जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा ठीक से काम कर रही है या नहीं।

मलिक आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता देने के एक अन्य मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है और आजीवन कैद की सजा काट रहा है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गवाहों की जिरह के लिए उसे (मलिक को) जम्मू की विशेष अदालत में शारीरिक रूप से पेश करने के (उस अदालत के) आदेश से नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान सीबीआई से (इस अदालत को) यह दिखाने के लिए कहा कि मलिक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने से इनकार कर दिया है।

पीठ के समक्ष सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह ट्रायल अदालत द्वारा पारित आदेश में दर्ज है।

शीर्ष अदालत ने हालांकि कहा, “न्यायाधीश (निचली अदालत) का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है।”

निचली अदालत के आदेश का हवाला देते हुए श्री मेहता ने कहा कि आदेश में कहा गया है कि आरोपी नंबर 1 (मलिक) ने अभियोजन पक्ष के गवाह से वर्चुअल के माध्यम से जिरह करने से इनकार कर दिया और अदालत के समक्ष अपनी शारीरिक उपस्थिति पर जोर दिया है ताकि वह अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह कर सके।

श्री मेहता ने कहा कि आदेश में यह भी दर्ज किया गया है कि आरोपी नंबर 1 किसी वकील को नियुक्त नहीं करना चाहता है और न ही वह किसी वकील की सेवाएं लेना चाहता है।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जम्मू के अतिरिक्त न्यायाधीश-तृतीय की दो जगहों पर की गई टिप्पणियों में दर्ज किया गया है कि उनकी अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है। इस तरह हम जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश देते हैं कि वे न्यायाधीश (विशेष अदालत के) द्वारा कही गई बातों पर गौर करें और एक उचित प्रणाली स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं, जिससे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई ठीक से की जा सके।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिससे प्रभावी जिरह हो सके। रजिस्ट्रार जनरल को आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए तथा विधिवत स्थापित प्रणाली की जांच के लिए एक अन्य रजिस्ट्रार को नियुक्त करने के पश्चात आगामी 18 फरवरी तक इस न्यायालय को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही कहा कि वह इस मामले में अगली सुनवाई 21 फरवरी को करेगी।

सीबीआई ने 1989 के चर्चित रुबैया सईद अपहरण तथा 1990 के श्रीनगर गोलीबारी मामलों की सुनवाई जम्मू से नयी दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि मलिक को वहां की विशेष अदालत में ले जाने की आवश्यकता न पड़े।

पिछले वर्ष दिसंबर में शीर्ष न्यायालय ने दोनों मामलों की सुनवाई जम्मू से दिल्ली स्थानांतरित करने की सीबीआई की याचिका पर जवाब देने के लिए छह आरोपियों को दो सप्ताह का समय दिया था।

एक मामला 25 जनवरी, 1990 को श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के चार कर्मियों की हत्या से संबंधित है, जबकि दूसरा 8 दिसंबर, 1989 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी सईद के अपहरण से संबंधित है।

प्रतिबंधित संगठन जेकेएलएफ के प्रमुख मलिक दोनों मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

सीबीआई ने सितंबर 2022 में जम्मू की निचली अदालत द्वारा पारित आदेश के खिलाफ तत्काल याचिका दायर की, जिसमें तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मलिक को सईद मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह करने के लिए शारीरिक रूप से पेश करने का निर्देश दिया गया था।

केंद्रीय एजेंसी ने अपनी याचिका में जोर देकर कहा था कि मलिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और उसे तिहाड़ जेल परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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