इंदौर: हाल ही में नया प्रयोग कर शहर की जनता ने देखा ट्रैफिक सिग्नल वाले मुख्य चौराहों पर पर कड़कड़ाती धूप से लोगों को बचाने के लिए छाया की गई. इसके लिए लोहे के एंगल भी लगा कर उस पर हरी नेट लगाई गई. कई लोगों ने इसकी सराहना की. लेकिन इस कार्य पर कुदरत ने निगम की किए कराए पर पानी फेर दिया और दिखावे के इस विकास कार्य की पोल खुल गई.
पिछले दो-तीन दिनों से शहर में आधी और तेज़ बरसात ने आफत बना रखी थी. इससे हर उस सिग्लन पर लगी हरी नेट फट गई लेकिन हैरानी वाली बात जब हुई तब लोहे के एगल सड़क पर ही गिर गए. इस घटना को दो दिन बीत चुके है लेकिन अभी तक नगर निगम ने इन एंगलों को उठाया तक नहीं है. जिस करण यातायात प्रभावित हो रहा है. कई वाहन चालक तो इन टूटे एंगलों में उलझ कर गिर रहे हैं.
इनका कहना है
इतना पैसा बर्बाद किया गया तो उसमें उच्च गुणवत्ता होती. खराब मलिटी से बनाए गए थे इसलिए गिर गए. खोटी नियत और भ्रष्टाचार से किया गया कार्य कुदरत को भी पसंद नहीं आया.
जावेद हबिब
सड़क किनारे अभी तक लोहे के एंगलों का कबाड़ा पड़ा है. स्मार्ट, क्लीन सिटी वाले अधिकारी अब कहां गए, उन्हें दिखाई नही दें रहा कि कितने लोग इससे परेशान और घायल हो रहे है.
रतन खत्री
जितना पैसा खर्च किया है सब आम जनता का है. प्रयोग करने से पहले उसमें मज़बूती क्यों नहीं रखी गई. जहां ऐसे शेड लगे हुए है उससे जनहानि हो सकती है. कठोर कारवाई हो.
मिलेंद्र सेन
