नई दिल्ली, भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस दौरान कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा घटकर ₹1,879 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹2,582 करोड़ था। हवाई यात्रा की मजबूत मांग के दम पर ऑपरेशंस से कंपनी की कुल कमाई सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ ₹23,364 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹18,555 करोड़ दर्ज की गई थी।
ईबीआईटीडीए मार्जिन में हुआ सुधार, ऊंची ईंधन लागत और अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल से प्रभावित हुआ मुनाफा
परिचालन के मोर्चे पर एयरलाइन के ईबीआईटीडीए (EBITDA) में 229 प्रतिशत का जबरदस्त सुधार देखा गया और यह पिछले साल के ₹579 करोड़ से बढ़कर ₹1,908 करोड़ हो गया। इससे कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 3.1 प्रतिशत से सुधरकर 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गया। हालांकि, ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और किराये से पहले की आय (EBITDAR) सालाना आधार पर 3 प्रतिशत घटकर ₹3,667 करोड़ रह गई। एविएशन सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस पैरामीटर में गिरावट का मुख्य कारण इस तिमाही में विमान ईंधन (ATF) की असाधारण ऊंची कीमतें और परिचालन लागत में वृद्धि रहा।
सीईओ विली वॉल्श ने कहा- मानसून तिमाही में हमेशा रहता है सुस्ती का असर, भारतीय एविएशन का भविष्य बेहद मजबूत
वित्तीय परिणामों पर टिप्पणी करते हुए इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने कहा कि सितंबर में समाप्त होने वाली यह तिमाही आमतौर पर एयरलाइन कारोबार के लिए थोड़ी सुस्त रहती है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों और ईंधन की बढ़ी कीमतों ने मार्जिन पर दबाव बनाया है। वॉल्श ने भरोसा जताया कि भारत में एविएशन सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाएं बेहद आकर्षक हैं। कंपनी सुरक्षित परिचालन, सख्त लागत नियंत्रण और अनुशासित विस्तार के जरिए निकट भविष्य की चुनौतियों से निपटने और भविष्य में टिकाऊ विकास दर हासिल करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है।

