शहरों का विकास अब केवल आवासीय कॉलोनियों और ऊंची इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं रह सकता. बदलती अर्थव्यवस्था में शहरों को उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित करना जरूरी है. इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश के शहरी विकास का जो रोड मैप प्रस्तुत किया है, वह प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं को विस्तार देने वाला है. वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और 20 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है. लेकिन इन लक्ष्यों की सफलता घोषणाओं से अधिक उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी.
इंदौर को केंद्र में रखकर 5000 एकड़ में प्रस्तावित फ्यूचर सिटी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके माध्यम से आवास, उद्योग और रोजगार को एक साथ विकसित करने की परिकल्पना की गई है. वहीं, इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर को मिलाकर इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक रीजन बनाने की योजना क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इससे आर्थिक गतिविधियों का विस्तार इंदौर तक सीमित रहने के बजाय आसपास के जिलों तक हो सकता है. आठ जिलों की अलग-अलग औद्योगिक, कृषि, धार्मिक पर्यटन और व्यावसायिक क्षमताओं का समन्वित उपयोग किया जाए तो मालवा-निमाड़ प्रदेश के प्रमुख आर्थिक विकास क्षेत्रों में उभर सकता है.
कॉन्क्लेव में 100 मंजिला इमारतों के निर्माण के लिए नियमों में छूट देने की बात भी सामने आई है. ऊंची इमारतें आधुनिक शहरी विकास का प्रतीक हो सकती हैं, लेकिन इनका औचित्य तभी है जब शहर में पर्याप्त सडक़ें, सार्वजनिक परिवहन, निर्बाध जलापूर्ति, सीवरेज, बिजली और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था हो. इंदौर पहले ही यातायात, पार्किंग और जल निकासी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में भवन निर्माण के नियमों में बदलाव करते समय शहर की वहन क्षमता और पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देनी होगी. अनियोजित विस्तार भविष्य में विकास की उपलब्धियों को ही संकट में डाल सकता है.
इसी तरह, इंदौर-भोपाल-जबलपुर औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना और इंदौर-उज्जैन के बीच बेहतर कनेक्टिविटी का प्रस्ताव औद्योगिक गतिविधियों को गति दे सकता है.
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न रोजगार की गुणवत्ता का है. फ्यूचर सिटी और नए औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को कितने अवसर मिलेंगे, छोटे कारोबारियों और उद्यमियों की भागीदारी कैसे बढ़ेगी तथा आवास आम नागरिक की पहुंच में कैसे रहेगा, इन सवालों के जवाब भी विकास की योजना में होने चाहिए.दरअसल,
मध्यप्रदेश के पास इंदौर जैसे तेजी से विकसित होते शहर, मजबूत व्यापारिक गतिविधियां और धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं. जरूरत इन क्षमताओं को एकीकृत विकास की नीति से जोडऩे की है. अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा, जब प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी हों, निवेश जमीन पर उतरे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे.बहरहाल, दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना तभी साकार होगा, जब शहरों की चमक के साथ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हो.
