छोटे किसानों की ताकत से बनेगा वैश्विक खाद्य सुरक्षा का भविष्य

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने रखा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां पूरी दुनिया को एक परिवार माना जाता है.

सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति, सहयोग और वैश्विक एकता का समर्थक रहा है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि समन्वय और साझेदारी की जरूरत है. यही सोच कृषि क्षेत्र में भी देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दे सकती है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां दुनिया भर के छोटे किसानों को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे समय में ब्रिक्स देशों का यह मंच साझा समाधान तलाशने का महत्वपूर्ण अवसर है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छोटे और सीमांत किसान सशक्त होंगे तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी.

करोड़ों लोगों को खाद्यन्न उपलब्ध करवा रहे
भारत की कृषि प्रगति का उल्लेख करते हुए चौहान ने बताया कि पिछले दस वर्षों में कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. देश का खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है. गेहूं उत्पादन लगभग 118 मिलियन टन, बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन और मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से अधिक हो चुका है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिससे करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि देश की करीब 43 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है. किसानों को उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं, तकनीक और विभिन्न सहायता योजनाओं का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं. चौहान ने कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं. ऐसे किसानों को सशक्त बनाना समावेशी विकास की सबसे बड़ी कुंजी है. उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाने और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

महिलाएं भी कर रही नेतृत्व
महिला और युवा शक्ति को कृषि परिवर्तन का आधार बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं. वहीं ड्रोन दीदी जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित बदलाव का नया उदाहरण बन रही हैं. अपने संबोधन के अंत में चौहान ने ब्रिक्स देशों से छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और टिकाऊ कृषि विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया.

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