हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के.टी. रामाराव (KTR) ने अपने पासपोर्ट की जब्ती और रीजनल पासपोर्ट ऑफिस द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को तेलंगाना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह कार्रवाई एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज किए गए बहुचर्चित ‘फॉर्मूला-ई कार रेस’ मामले के सिलसिले में की गई है। न्यायमूर्ति ई. वी. वेणुगोपाल की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को एक अंतरिम आदेश पारित किया, जिसके तहत 28 सितंबर के कारण बताओ नोटिस और पासपोर्ट जब्ती की कार्रवाई पर आगामी 6 नवंबर तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
केटीआर के वकील ने लगाया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप, कहा- चार्जशीट के बाद कोर्ट में पेश हो चुके हैं याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गंद्रा मोहन राव ने अदालत में दलील दी कि एसीबी मामले में केटीआर को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही उन्होंने कोई नियम तोड़ा है। इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और याचिकाकर्ता खुद एसीबी कोर्ट के समक्ष पेश हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पासपोर्ट अधिकारी ने बिना समुचित प्रक्रिया अपनाए एकतरफा कार्रवाई की है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के सरासर खिलाफ है। वहीं, केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बी. नरसिम्हा शर्मा ने तर्क दिया कि कानूनन बाध्य न होने के बावजूद पासपोर्ट अथॉरिटी ने केटीआर को अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का मौका दिया था।
हाईकोर्ट ने पूछा क्या कोर्ट की इजाजत से हुई कार्रवाई, केंद्र सरकार और एसीबी को नोटिस जारी कर 6 नवंबर तक मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वेणुगोपाल ने इस बात पर सवाल उठाया कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद क्या पासपोर्ट विभाग ने कार्रवाई से पहले संबंधित कोर्ट से पूर्व अनुमति ली थी। इस पर एसीबी के वकील ने बताया कि पासपोर्ट जब्ती से जुड़ा एक मेमो निचली अदालत में दाखिल किया गया था। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर (RPO) और एसीबी के महानिदेशक को नोटिस जारी कर अपना जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है तथा मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर तय की है।

