
सीहोर। 12 दिवसीय गणेश महोत्सव के अंतिम दिन भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला बना रहा. सुबह से जारी हवन- पूजन के बाद भक्तों ने भगवान श्रीगणेश जी को अगले बरस फिर आने का न्यौता देकर भक्तिभाव के साथ विसर्जन किया. टाउन हाल के समीप स्टॉप डेम और सीवन नदी के महिला घाट पर विसर्जन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा.
नगर में 10 दिनों से चल रहे गणेश उत्सव का समापन शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ. सुबह से ही पंडालों में हवन-पूजन और महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. गणपति बप्पा की महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए रवाना किया. पूरे शहर का वातावरण भक्ति और उमंग से सराबोर हो गया.अनंत चतुर्दशी पर शहर में करीब 200 से अधिक स्थानों से प्रतिमाओं की स्थापना विधि विधान से की गई थी. शुक्रवार को दोपहर बाद से ही श्रद्धालुओं और समितियां के कार्यकताओं ने गाजे-बाजों के साथ चल समारोह निकाल कर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया. टाउन हॉल के पास बने स्टॉप डैम, सीवन नदी घाट और अन्य जल स्रोतों पर देर रात तक प्रतिमा विसर्जन का क्रम चलता रहा. श्रद्धालु पूरी आस्था और भावनाओं के साथ भगवान गणेश को विदाई देने पहुंचे. नगर पालिका द्वारा घाटों पर क्रेन, नाव, गोताखोर और नगर सैनिकों की विशेष व्यवस्था की गई थी. वहीं, नपा ने इस बार समय से पहले घाट पर सराहनीय इंतजाम कर श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा. गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन ने पूरे नगर को भक्ति और उल्लास के साथ एक सूत्र में बांध दिया था. छोटे-बड़े सभी पंडालों से निकली झांकियों ने माहौल को और भव्य बना दिया. श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं के साथ सुख-समृद्धि और शांति की कामना की. नगर पालिका की ओर से झांकियों और अखाड़ों को पुरस्कृत करने की भी घोषणा की गई. हजारों की भीड़ के बावजूद प्रशासन की सख्त सुरक्षा और समुचित व्यवस्था के चलते आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य रहा. इसके अलावा अनेक सामाजिक, राजनीतिक संगठनों द्वारा भी मंच लगाकर अखाड़ों के कलाकारों का स्वागत किया गया.
झिलमिलाती झांकियों व अखाड़ों से सजी रात
शाम ढलते ही नगर में विशाल चल समारोह निकाला गया, जिसमें मनमोहक झांकियों और अखाड़ों ने लोगों का मन मोह लिया. युवाओं की टोली ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करती हुई विसर्जन जुलूस में शामिल रही. रात कोतवाली चौराहे से शुरू हुआ चल समारोह मेन रोड, लीसा टाकीज, तहसील चौराहा तक पहुंचा. जगह-जगह बने मंचों से झांकियों और अखाड़ों का स्वागत किया गया. ग्रामीण अंचलों से आए हजारों महिला-पुरुष और बच्चे देर रात तक इन झांकियों का आनंद उठाते रहे.
अनंत चतुर्दशी पर किया प्रतिमाओं का विसर्जन
शाहगंज. बारह दिवसीय गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ हुआ. गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ की कामना के साथ नगर वासियों ने बप्पा को विदाई दी. अनंत चतुर्दशी के पर्व पर इस वर्ष परंपरागत गणेश प्रतिमाओं का चल समारोह नहीं निकाला गया. गणेश उत्सव समिति के सदस्यों द्वारा अपनी सुविधानुसार भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन हेतु गाजे-बाजे के साथ नर्मदा तट तक लेकर पहुंचे नर्मदा तट पर गणपती बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के जयघोष के साथ भगवान गजानन को भावभीनी बिदाई दी गई. गणेश प्रतिमाओं को नर्मदा घाट पर आरती और पूजन के साथ विसर्जित किया गया. शाम को विश्रामगृह घाट पर गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए हुजूम उमड़ पड़ा. घरों में विराजी भगवान गणेश की प्रतिमा को लोग परिवार सहित विसर्जन करने पहुंचे. भगवान गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए छोटे-छोटे बच्चे भी अपने सिर पर एवं कंधे पर रखकर गणेश प्रतिमा नर्मदा तट तक लेकर आए एवं गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष के साथ नर्मदा में विसर्जित किए. श्रद्धालु अपने घरों से गणेश प्रतिमाएं भी लेकर विसर्जन करने के लिए नर्मदा तट पर पहुंचे एवं पूजा तथा आरती के पश्चात प्रतिमाओं का विसर्जन किया. विसर्जन शाम से देर रात्रि तक चलता रहा. समारोह के आखिरी दिन कई जगह महाआरती,छप्पन भोग एवं भंडारे का आयोजन भी किया गया .
