नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसले दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए जाने के फैसलों के परिप्रेक्ष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गयी है।
याचिका में एसआईआर के दौरान 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाये जाने के मामले की न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की भी मांग की गयी है।
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपनी याचिका में यह घोषित करने की मांग की है कि बहुमत के चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना आयोग के लिए गये फैसलों को अवैध और अमान्य माना जाये। याचिका में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गयी है।
याचिका के अनुसार, आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के नाम पर एकतरफा लिये गये फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर लिखित असहमति या आपत्तियां दर्ज करायी थीं।
जनहित याचिका में चुनाव पंजीकरण नियम, 1960 के तहत वैधानिक फॉर्म छह को बहाल करने की भी मांग की गयी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए बिना किसी विधायी अधिकार या नियमों में संशोधन के पैतृक लिंक (2003 एसआईआर लिंक) की अनिवार्यता लागू की गयी थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) से उनके वैधानिक अधिकार छीन लिये गये और मतदाता सूची प्रबंधन का पूरी तरह से केंद्रीकरण कर इसे चुनाव आयोग की आईटी शाखा के तहत ला दिया गया। याचिका में सॉफ्टवेयर में ‘रोलबैक’ सुविधा की अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया गया है, जिसके कारण गोवा के राज्य चुनाव अधिकारियों के बार-बार इस फीचर को सक्रिय करने के अनुरोध के बावजूद 97 पात्र मतदाताओं के नाम बहाल नहीं किये जा सके।
पश्चिम बंगाल एसआईआर के मुद्दे पर, याचिका में मतदाता सूची से पहले बाहर किये गये मतदाताओं के नाम बहाल करने के खिलाफ चुनाव आयोग के दायर 16.10 लाख से अधिक अपीलों पर सवाल उठाये गये हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि ये अपीलें बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों या राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की जानकारी या मंजूरी के बिना दायर की गयी थीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने आईटी निगरानी ढांचे में बदलाव किया और उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार को आईटी संबंधी मामलों से हटा दिया, जिसके चलते चुनाव आयुक्त संधू और जोशी को कैबिनेट सचिव से संपर्क करना पड़ा।
