
मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
कांग्रेस के उत्कर्ष काल में मंदसौर जिले की गरोठ विधानसभा में समय ऐसा भी था जब विपक्ष का नाम लेना भी मुश्किल था. तब कुछ चुनिंदा लोग ही थे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. उन्होंने संघर्ष किया, विरोध झेला, दुख भारी रातें काटीं, लेकिन पार्टी का साथ नहीं छोड़ा. उसी त्याग और समर्पण की बदौलत आज भाजपा संगठन मजबूत खड़ा है, लेकिन विडंबना यह है कि वही नींव के पत्थर आज पहचान के मोहताज हो गए हैं. पार्टी या शासकीय कोई भी कार्यक्रम हो, ये त्यागी कार्यकर्ता उपेक्षित किए जाने से दु:खी हैं. न सम्मान दिखाई देता है न ही कार्यक्रमों में उनकी पहचान नजर आती है. सम्मान तो दूर, मीडिया कवरेज में भी इनके नामों को भेजने में पार्टी कर्ताधर्ता तवज्जो नहीं देते. आज के दौर में स्थिति उलटती नजर आ रही है. कुछ नए चेहरे, जो कभी अपने स्तर पर पार्टी के लिए एक छोटा सा योगदान भी नहीं दे पाए, वे सबसे आगे खड़े होकर सुर्खियों में जगह तलाशते हैं. ऐसे माहौल ने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के मन में निराशा भर दी है.
इधर भी नाराजगी
झाबुआ भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष और पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष दौलत भावसार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में निमंत्रण नही मिलने पर नाराजगी जताई है. चूंकि कार्यक्रम सरकारी था, लेकिन उनका गुस्सा स्थानीय संगठन ईकाई पर फूटा. उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के कुछ पदाधिकारियों के कहने पर निमंत्रण नहीं भेजा गया. जबकि पार्टी के उपर से निर्देश थे केि कार्यक्रम में पूर्व पदाधिकारियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए. इस बात की शिकायत भावसार ने प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री तक करने की बात कही है.
पार्षद ने घेरा : चुना महापौर, मिला प्रतिनिधि
विगत दिनों देवास में अपनी अनदेखी से नाराज कांग्रेस पार्षद पं. दीपेश कानूनगो ने महापौर गीता अग्रवाल के साथ भाजपा पर निशाना साधा है. वार्ड समस्या को लेकर रहवासियों के साथ मिलने पहुंचे कानूनगो को महापौर की जगह उनके प्रतिनिधि के तौर पर उनके पति दुर्गेश अग्रवाल को सामने देख कानूनगो का पारा चढ़ गया. इसको मुद्दा बना उन्होंने महापौर के साथ भाजपा को भी घेर लिया. उन्होंने इसे देवास की जनता के साथ धोखा बताते हुए टिप्पणी की कि लोगों ने विश्वास जताते गीता अग्रवाल के रूप में भाजपाई महापौर चुना था, मगर मिला महापौर प्रतिनिधि. दरअसल वार्ड पार्षद जब अपने वार्डवासियों को लेकर नगर निगम पहुंचे तो महापौर नगर निगम में नहीं मिली तब कानूनगो ने उन्हें दो बार फोन लगाया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. इसके पश्चात कमिश्नर द्वारा उन्हें बुलाकर चर्चा की गई तथा उपायुक्त आरती खेडेेकर द्वारा मांग पत्र लिया गया तथा आश्वासन दिया गया कि आपकी सभी मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा. दीपेश कानूनगो का आरोप था कि अभी लगभग 450 टेंडर लगे हुए है जिसमें से एक भी टेंडर उनके वार्ड क्र 9 का नहीं लगा है. उनका कहना है , मेरे वार्ड में कार्यों की फाइल लगवाई जाती है, पर महापौर प्रतिनिधि के इशारे पर आगे नहीं बढ़ पाती.
