नयी दिल्ली, 17 जुलाई (वार्ता) दक्षिण भारत की जानी-मानी कपड़ा कंपनी रामराज कॉटन तमिलनाडु के तिरुपुर में डार्क फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही है, जो देश ही नहीं दुनिया में इस क्षेत्र की पहली डार्क फैक्ट्री होगी। डार्क फैक्ट्री पूरी तरह स्वचालित संयंत्र होता है, जिसमें सारा काम रोबोट, एआई और आईओटी की मदद से होता है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप बिल्कुल भी नहीं होता। रोबोट कोडिंग के अनुसार सारा काम करते हैं, जिसमें एआई और आईओटी उनकी मदद करते हैं। राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम् में चार दिवसीय वैश्विक टेक्सटाइल प्रदर्शनी ‘भारत टेक्स 2026’ में एक संवाददाता सम्मेलन से इतर मीडिया से बात करते हुए रामराज कॉटन के प्रतिनिधि श्री मूर्ति ने बताया कि दुनिया में कहीं भी टेक्सटाइल उद्योग में डार्क फैक्ट्री नहीं लगायी गयी है। इसलिए, इसका समाधान और तकनीक खुद ही विकसित करनी होगी। एआई और इस काम की कंपनी की गहरी जानकारी को मिलाकर काम होगा।
उन्होंने बताया कि डार्क फैक्ट्री में सबसे बड़ी समस्या है फैब्रिक को हैंडल करना। इसमें हवा का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान किया जायेगा। कंपनी सर्वम् और जोहो से इस बारे में बात कर रही है।
श्री मूर्ति ने कहा, “ हम इसके लिए कुछ पूंजी निवेश करने के लिए भी तैयार हैं। इस पर पांच प्रतिशत काम हो चुका है।
पहले हम 20 लोगों का काम एक छोटी सी फैक्ट्री में शुरू करेंगे जो त्रिपुर में ही होगी।” उन्होंने बताया कि प्रारंभिक प्रयोग सफल रहने पर उसका विस्तार किया जायेगा। वहां धागे तैयार करने से लेकर सिले-सिलाये कपड़े तैयार करने तक का काम किया जायेगा। श्री मूर्ति के अनुसार, रामराज के एक कंसल्टेंट की कंपनी में चीन से मंगाये गये छोटे-छोटे रोबोट सिलाई का काम कर रहे हैं। साथ टाटा समूह की सूचना एवं प्रौद्योगिकी कंपनी टीसीएस ने कांचीपुरम् में डार्क फैक्ट्री को लेकर कुछ काम किया है, लेकिन वह टेक्सटाइल से अलग है। अमेरिकी कंपनी टेस्ला ने भी डार्क फैक्ट्री लगायी है। यह एक ऐसा प्रयोग है जो जरूर किया जाना चाहिये।

