श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चल रहे 10 दिवसीय सत्र के दूसरे दिन भी सदन की कार्यवाही भारी हंगामे के बीच शुरू हुई। प्रश्नकाल के दौरान सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों ने आर्टिकल 370 हटने के बाद खत्म की गई पार्टी संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की पुण्यतिथि (5 दिसंबर) पर राजकीय अवकाश को दोबारा बहाल करने की पुरजोर मांग उठाई। एनसी विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत यह मामला उठाते हुए कहा कि यदि यह छुट्टी बहाल नहीं की जाती है, तो सरकार को महाराजा हरि सिंह की छुट्टी पर भी पुनर्विचार करना चाहिए। इस मांग के सामने आते ही विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने कड़ा एतराज जताया और सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
महाराजा हरि सिंह की छुट्टी रद्द करने की उठी बात पर गरमाई राजनीति, पीडीपी विधायक ने 13 जुलाई के अवकाश की भी की मांग
सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच छिड़ी इस बहस ने सदन का माहौल पूरी तरह गर्म कर दिया। बीजेपी विधायकों ने स्पष्ट किया कि महाराजा हरि सिंह की छुट्टी किसी भी कीमत पर रद्द नहीं होने दी जाएगी और सत्ताधारी पार्टी सदन का समय बर्बाद कर रही है। इसी बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायक वहीद पर्रा ने भी इस विवाद में कूदते हुए 13 जुलाई के ऐतिहासिक अवकाश को फिर से बहाल करने की मांग रख दी, जिससे सदन में विरोध के सुर और तेज हो गए। हालांकि विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस विषय पर उचित समय पर सदन में विस्तार से चर्चा की जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा विधायक शांत नहीं हुए और सदन से वॉकआउट कर गए।
विपक्ष ने उठाए बुनियादी और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे, राज्य का दर्जा बहाल करने के नारों से गूंजा सदन
सत्र के पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी बिजली-पानी की आपूर्ति, दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) जैसे जनहित के मुद्दों पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा। बीजेपी सदस्यों ने जनता से जुड़े इन विषयों पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसे स्पीकर ने रिकॉर्ड से बाहर करने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी अपनी आवाज बुलंद करते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने की पुरजोर मांग की, जिससे पूरे सदन में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

