ओटावा, 17 सितंबर (वार्ता) कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने उनके देश को यूरोपीय संघ (ईयू) का अपना पहला “सहयोगी सदस्य” बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच दोनों पुराने सहयोगियों के बीच करीबी संबंध आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकते हैं तथा अमेरिका पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद के सदस्यों और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को संबोधित करते हुए श्री कार्नी ने गुरुवार को प्रस्ताव में कनाडा की रुचि की पुष्टि की। सुश्री वॉन डेर लेयेन ने एक दिन पहले अपने वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में यह प्रस्ताव रखा था। हालांकि, ऐसी सदस्यता की शर्तों पर अभी चर्चा होनी बाकी है।
श्री कार्नी ने अपने संबोधन में बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के बीच कनाडा को 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ का स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ व्यापार और यात्रा संबंधी बाधाओं को कम करने तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक एकीकरण का प्रस्ताव रखा।
यह संबोधन कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता एक बार फिर विफल होने तथा दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे पर नये शुल्क लगाए जाने के बाद हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा-ईयू व्यवस्था के प्रस्ताव के कड़े आलोचक रहे हैं और चेतावनी दे चुके हैं कि यदि उन्हें यह कदम शत्रुतापूर्ण लगा तो वह यूरोप पर भारी शुल्क लगा सकते हैं।
श्री कार्नी ने स्पष्ट किया कि यूरोप के साथ गहरे संबंधों का उद्देश्य अमेरिका को आर्थिक या रणनीतिक साझेदार के रूप में हटाना नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं महान शक्ति का प्रतिद्वंद्वी बनने के लिए किसी तीसरे गुट का प्रस्ताव नहीं कर रहा हूं, वह भी केवल बेहतर तौर-तरीकों के साथ।”
उन्होंने कहा, “हम दूसरों पर प्रभुत्व जमाने के लिए शक्ति नहीं चाहते। इसके विपरीत, हम ऐसी मजबूती चाहते हैं जिससे कोई भी हमारे खुले बाजारों को नियंत्रित न कर सके, हमारी संप्रभुता को प्रभावित न कर सके, हमारी क्षेत्रीय अखंडता को खतरा न पहुंचा सके या हमारी स्वतंत्रता, लोकतंत्र और कानून के शासन को कमजोर न कर सके।”
उन्होंने कहा कि कनाडा और यूरोप को अपने रक्षा उद्योगों को मजबूत करना चाहिए, संप्रभु कंप्यूटिंग क्षमता और एआई नियमन के क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए तथा दोनों क्षेत्रों के बीच छात्रों की आवाजाही को आसान बनाना चाहिए।
श्री कार्नी ने संसद में कहा, “हम केवल अच्छे समय के सहयोगी नहीं हैं। हम एक-दूसरे की कीमत पर लाभ हासिल करने वाले समझौते नहीं करते।” उन्होंने कहा कि कानून के शासन, मानव गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा के प्रति दोनों की प्रतिबद्धता समान आधार पर टिकी है।
उन्होंने कहा कि कनाडा यूरोप को प्राकृतिक गैस और हाइड्रोजन समेत ऊर्जा तथा आने वाले दशकों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध करा सकता है। इसके बदले कनाडा यूरोपीय रक्षा खरीद और विकास में योगदान दे सकता है तथा विदेशी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप के साथ “संप्रभु कंप्यूटिंग क्षमता” विकसित करने में काम कर सकता है।
श्री कार्नी ने यूरोपीय संघ के छात्र आवाजाही और आदान-प्रदान कार्यक्रम ‘इरास्मस’ में कनाडा को शामिल करने का भी प्रस्ताव रखा। इस कार्यक्रम का बजट 26.2 अरब यूरो है।
उन्होंने कहा, “कनाडा और यूरोप को वित्तीय सेवाओं के लिए एक एकीकृत बाजार की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए, ताकि हमारे नागरिकों के लिए विकल्प बढ़ें और लागत कम हो।”
श्री ट्रंप ने बुधवार को सुश्री वॉन डेर लेयेन के प्रस्ताव पर नाराजगी जताते हुए कनाडा के यूरोपीय संघ का सहयोगी सदस्य बनने के विचार को “हंसी के लायक” बताया था और चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें यह कदम शत्रुतापूर्ण लगा तो यूरोप को भारी शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
श्री कार्नी ने बाद में कहा कि कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच करीबी संबंधों से अंततः वाशिंगटन को भी फायदा हो सकता है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “इससे यूरोप मजबूत होगा। इससे कनाडा मजबूत होगा। इससे कनाडा अमेरिका का बेहतर साझेदार बनेगा।”
