
सिंगरौली । आबकारी कार्यालय से महज 300 मीटर दूर ढाबे में शराब बिक्री पकड़े जाने के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला मुख्यालय बैढ़न के बिलौंजी मुख्य मार्ग के किनारे एक ढाबा से देशी-विदेशी शराब बरामद हुई है। वही इस मामले में आबकारी अमले की चुप्पी और शराब माफियाओं पर कार्रवाई न करना कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं।
जिला मुख्यालय बैढ़न के बिलौंजी स्थित एमपीईबी तिराहे पर एक ढाबे में आबकारी विभाग ने छापेमारी कर अवैध रूप से बेची जा रही शराब पकड़ी। यह शराब रामनरेश के कब्जे से बरामद हुई है। कार्रवाई की सबसे चर्चित बात यह रही कि संबंधित ढाबा आबकारी कार्यालय से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विभाग की नाक के नीचे शराब की बिक्री कैसे चलती रही। कार्रवाई के बाद अब असली सवाल शराब की सप्लाई को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ढाबों, किराना दुकानों और अन्य स्थानों तक देशी-विदेशी शराब आखिर कहां से पहुंच रही है। यदि शराब अधिकृत दुकान से खरीदी गई थी तो उसकी बिक्री किसके माध्यम से और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी भी जांच जरूरी है। केवल बिक्री करने वाले पर कार्रवाई से पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो सकेगा।
गली-मोहल्ले में पैकारी का कारोबार जोरो पर
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी गांव-गांव और गली-मोहल्लों में कथित पैकारी तथा अवैध शराब बिक्री के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मिलावटी शराब के कारोबार की शिकायतें भी बताई जा रही हैं। लोगों का आरोप है कि छिटपुट कार्रवाई के बाद मामला शांत हो जाता है, जबकि सप्लाई करने वालों तक कार्रवाई नहीं पहुंचती। सरई क्षेत्र में पूर्व में महिलाओं द्वारा आबकारी टीम को घेरने की घटना भी चर्चा में रही थी। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। स्थानीय लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग को केवल खानापूर्ति वाली कार्रवाई के बजाय शराब की आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचना चाहिए। हालांकि ठेकेदारों को संरक्षण देने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विभाग की प्रभावी जांच और कार्रवाई से ही इन सवालों का जवाब मिल सकेगा।
