
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (वार्ता) भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों (बीओसीडब्ल्यू) के कल्याण, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शनिवार को मुंबई में संपन्न हो गया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से 11-12 सितंबर को इस सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें केंद्र सरकार, राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों, बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों तथा अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सम्मेलन के पहले दिन की अध्यक्षता की।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव ने दूसरे दिन अपने उद्घाटन संबोधन में निर्माण श्रमिकों के लिए कौशल विकास व्यवस्था को मजबूत करने और नीतियों एवं कार्यक्रमों के केंद्र में श्रम की गरिमा को रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक उत्तरदायी, समावेशी और मजबूत श्रम व्यवस्था के निर्माण के लिए यह आवश्यक है। सचिव ने श्रम बाजार में सूचना और सेवाओं तक पहुंच की असमानता दूर करने तथा नौकरी तलाशने वालों और नियोक्ताओं के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं को तैयार करते समय श्रमिकों की अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को ध्यान में रखा जाना चाहिए। साथ ही, निर्माण श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य, शारीरिक सुरक्षा और कार्यस्थल से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
सम्मेलन में बीओसीडब्ल्यू कल्याण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई। सचिव ने कल्याण से जुड़ी विविध पहलों को समेकित करने और टिकाऊ कल्याण योजनाओं के लिए एक्चुरियल विश्लेषण यानी बीमांकिक आकलन के अधिक इस्तेमाल की आवश्यकता बतायी।
दूसरे दिन की शुरुआत ‘नए श्रम संहिताओं के संदर्भ में बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों की भूमिका और जिम्मेदारियां’ विषयक सत्र से हुई। उत्तर प्रदेश ने निर्माण श्रमिकों के कौशल विकास पर अपनी पहल प्रस्तुत की, जबकि राजस्थान ने डिजिटल लेबर चौकों के अपने अनुभव साझा किये। बिहार ने श्रम सेवा सुविधा केंद्रों और असम ने ‘निर्माण सखी पोर्टल’ से संबंधित जानकारी दी। प्रस्तुतियों के बाद राज्यों और अन्य हितधारकों के बीच चर्चा हुई। इसके बाद कौशल विकास एवं रोजगार पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने कौशल विकास से जुड़ी प्रस्तुति दी, जबकि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने भारत में रोजगार वृद्धि की स्थिति पर जानकारी साझा की।
