नयी दिल्ली, 26 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने गंभीर आर्थिक संकट से घिरे भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की 19,700 करोड़ रुपए की समाधान योजना को बरकरार रखते हुए उसके खिलाफ दायर अपीलों को शुक्रवार को खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा तथा न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने 17 फरवरी, 2020 को एनसीएलएटी द्वारा पारित फैसले पर मुहर लगा दी।
पीठ ने कंपनी में जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा किए गए लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश पर गौर किया और बीपीएसएल के पूर्व प्रवर्तकों एवं कुछ लेनदारों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि उसे इन अपीलों में कोई दम नहीं लगता।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि जेएसडब्ल्यू ने बीपीएसएल को लाभ कमाने वाली कंपनी बनाने में भारी निवेश किया है। उसे ऐसा करने के लिए उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने अपने 136 पृष्ठों के फैसले में कहा, “सफल समाधान आवेदक (एसआरए) – जेएसडब्ल्यू ने इकाई (कॉर्पोरेट देनदार) के आधुनिकीकरण और विस्तार में भारी मात्रा में निवेश किया है। इतना ही नहीं, एसआरए – जेएसडब्ल्यू द्वारा लागू की जा रही समाधान योजना के कारण कॉर्पोरेट देनदार के चालू व्यवसाय के रूप में चलने से हजारों कर्मचारी अपनी आजीविका कमा रहे हैं।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यान्वयन में देरी जेएसडब्ल्यू या ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के कारण नहीं हुयी।दोनों ही बाधाओं के बावजूद योजना को लागू करने का प्रयास किया जा रहा था।
शीर्ष अदालत की विशेष पीठ ने इस मामले में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद 11 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

