अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित, भाजपा में कई नाम चर्चा में

सुसनेर, नगर परिषद सुसनेर में अध्यक्ष पद के उपचुनाव की तारीख घोषित होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी में टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है. पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ऐसे चेहरे का चयन करना है, जो संगठन के साथ-साथ चुनावी मैदान में भी मजबूत साबित हो.

भाजपा के अंदर अध्यक्ष पद के लिए कई नामों की चर्चा चल रही है. इनमें नगर परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप सोनी, पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष मंगीलाल सोनी, ईश्वर सिंह कावल प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं. हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा संगठन और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को करना है. कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप सोनी अपने कार्यकाल के दौरान नगर परिषद में किए गए कार्यों को अपनी दावेदारी का आधार बना रहे हैं. उनके समर्थकों का मानना है कि कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्हें नगर परिषद की कार्यप्रणाली और स्थानीय मुद्दों की बेहतर समझ है. यही अनुभव चुनाव में भाजपा के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. वहीं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया भी अध्यक्ष पद के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं. उनके समर्थकों द्वारा पूर्व कार्यकाल में किए गए कार्यों और राजनीतिक अनुभव को प्रमुखता से सामने रखा जा रहा है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने पुराने अनुभव और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रहेगी. भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष मंगीलाल सोनी का नाम भी टिकट की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है. लंबे समय से संगठन से जुड़े होने के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान है. संगठनात्मक अनुभव के आधार पर उनकी दावेदारी को भी नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा. ईश्वर सिंह कावल भाजपा समर्थित है नप अध्यक्ष उम्मीदवार हैं.

टिकट किसके नाम… ?

भाजपा के लिए अध्यक्ष पद का उपचुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की पकड़ और स्थानीय नेतृत्व की परीक्षा भी माना जा रहा है. टिकट के लिए कई दावेदार सामने होने से पार्टी नेतृत्व को सामाजिक समीकरण, संगठन के प्रति निष्ठा, जनाधार और चुनाव जिताने की क्षमता जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा. राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा नेतृत्व अनुभव को प्राथमिकता देगा या नए चेहरे पर दांव लगाएगा. टिकट की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगेगा, लेकिन फिलहाल हर दावेदार अपने-अपने स्तर पर समर्थकों को सक्रिय करने में जुटा हुआ है.

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