नयी दिल्ली, 11 सितंबर (वार्ता) घुटने की सर्जरी के एक साल बाद, ग्रीको-रोमन पहलवान सुनील कुमार नए आत्मविश्वास के साथ एशियन गेम्स में हिस्सा लेने जा रहे हैं। उनका मानना है कि चोट की वजह से आई रुकावट ने उन्हें और मज़बूत बनाया है और अब वे आइची-नागोया में 87 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने का लक्ष्य बना रहे हैं।
हांगझोऊ 2022 में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाले सुनील ने मुश्किल रिहैबिलिटेशन (चोट से उबरने) के दौर के बाद वापसी की है और अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स के अपने अनुभव को गोल्ड मेडल में बदलने पर है।
सुनील ने कहा, “मैंने अपने गाँव में कुश्ती शुरू की थी, और शुरुआत में यह बस एक ऐसी चीज़ थी जिसे करने में मुझे मज़ा आता था। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ और मुक़ाबलों में हिस्सा लेने लगा, मुझे लगा कि मुझे सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने देश के लिए भी कुछ करना चाहिए। यह सोच तब से मेरे साथ है और आज भी मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।”
87 किग्रा वर्ग के इस पहलवान का मानना है कि उज़्बेकिस्तान में हाल ही में हुए ट्रेनिंग कैंप ने उनकी तैयारियों को और मज़बूत किया है। देश के कुछ बेहतरीन पहलवानों के साथ ट्रेनिंग करने से – जिनमें 2022 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट भी शामिल थे – उन्हें हाई-लेवल के प्रतिद्वंद्वियों के ख़िलाफ़ खुद को परखने का मौका मिला।
“अभी मेरा पूरा ध्यान एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर है। मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ, वह उसी एक लक्ष्य को पाने के लिए है। हाल ही में उज़्बेकिस्तान में हमारा एक ट्रेनिंग कैंप हुआ था, और वह बहुत अच्छा रहा। उज़्बेक पहलवान बहुत अच्छे हैं, और वहाँ 2022 के कुछ गोल्ड मेडलिस्ट भी ट्रेनिंग कर रहे थे। उस स्तर के पहलवानों के साथ ट्रेनिंग करने से हम सभी को बेहतर बनने की प्रेरणा मिली।”
सुनील की वापसी का सफ़र चिंताओं से मुक्त नहीं रहा है। पिछले साल घुटने की सर्जरी होने के बाद, वे मानते हैं कि दोबारा चोट लगने का डर उस मानसिक चुनौती का हिस्सा है जो हाई-लेवल पर कुश्ती करने के साथ आती है। “पिछले साल मेरे घुटने की सर्जरी हुई थी, इसलिए मुझे पता है कि चोट लगने पर कैसा महसूस होता है। चोट का डर हमेशा मन के किसी कोने में रहता है; कोई भी पहलवान यह नहीं कह सकता कि उसे ऐसा महसूस नहीं होता। लेकिन अगर चोटें इस खेल का हिस्सा न होतीं, तो कोई भी वह कर सकता था जो हम करते हैं। हर किसी के मन में थोड़ा-बहुत वह डर होता है। यह इस लेवल पर खेल खेलने का ही एक हिस्सा है।”
एशियाई खेल अब उनकी पहली प्राथमिकता हैं, और सुनील ने अपनी अगली चुनौती की योजना भी बना ली है। पहलवान को उम्मीद है कि वह 2027 में ओलंपिक क्वालिफिकेशन की अपनी मुहिम शुरू कर पाएंगे। एशियाई खेल खत्म होने के बाद, 2027 से ओलंपिक के लिए मेरी तैयारी ठीक से शुरू होगी, जब क्वालिफिकेशन इवेंट्स शुरू होंगे। मेरे लिए अगला बड़ा लक्ष्य यही होगा।”
