तिरुवनंतपुरम/दिल्ली | केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की उच्च स्तरीय बैठक से सांसद शशि थरूर की अनुपस्थिति ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, थरूर हाल ही में कोच्चि में राहुल गांधी की ‘महापंचायत’ के दौरान हुए व्यवहार से आहत हैं। आरोप है कि उन्हें राहुल गांधी के आने से पहले अपना भाषण जल्द खत्म करने को कहा गया, जिसे थरूर ने अपने कद और सम्मान के खिलाफ माना। हालांकि, उनके कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर कालीकट में एक साहित्य महोत्सव में व्यस्त होने का हवाला दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह नाराजगी का ही एक संकेत है।
आज दोपहर 2:30 बजे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ होने वाली इस बैठक में केरल के भविष्य की चुनावी रणनीति तय होनी थी। शशि थरूर की गैर-मौजूदगी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि शहरी मध्यम वर्ग और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। पार्टी के भीतर यह असंतोष ऐसे समय पर सामने आया है जब कांग्रेस को एकजुट होकर विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरना है। फिलहाल, आलाकमान इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन भीतरखाने मतभेदों को सुलझाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं ताकि चुनावी गणित न बिगड़े।
बैठक से दूरी के बीच थरूर का एक और बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा कि वे मोदी सरकार को लोकतंत्र विरोधी नहीं कहेंगे, लेकिन वह ‘नेहरू-विरोधी’ जरूर है। उन्होंने कहा कि देश की हर समस्या के लिए पंडित नेहरू को बलि का बकरा बनाना गलत है। थरूर ने नेहरू के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए यह भी स्वीकार किया कि उनकी गलतियों को मानना जरूरी है, लेकिन उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। थरूर के ये बयान और पार्टी की बैठकों से दूरी यह साफ करती है कि कांग्रेस के भीतर वैचारिक और व्यक्तिगत स्तर पर खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है।

