नयी दिल्ली ,10 सितम्बर (वार्ता) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली के महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने कहा है कि देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में अगले एक दशक में बड़ा बदलाव होने की संभावना है जिसमें भौतिक बाड़ की जगह धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉनिक, अंतरिक्ष आधारित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित प्रणालियां ले सकती हैं।
डॉ. दास ने गुरुवार को यहां ‘इंडिया फेंस एक्सपो 2026’ के चौथे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पारंपरिक भौतिक बाड़ के बजाय स्पेक्ट्रम पर नियंत्रण, उपग्रहों, अंतरिक्ष आधारित संसाधनों, आपस में जुड़े नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर अधिक निर्भर होगी।
उन्होंने कहा, ”अगले 10 साल आगे बढ़कर देखें तो मुझे लगता है कि यह भौतिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी, आगे जो सुरक्षा दिखाई देगी, वह पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा होगी।”
उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का विकास विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम पर अधिक नियंत्रण और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों के इस्तेमाल से होगा। उन्होंने कहा कि आगे स्पेक्ट्रम पर प्रभुत्व होगा। उपग्रह और अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुएं उन सभी कामों को करेंगी, जो अभी तार काटकर और अंदर घुसकर किए जाते हैं। इस तरह सुरक्षा पूरी तरह अदृश्य होगी।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक जवाबी उपायों और उनके जवाब में किए जाने वाले उपायों के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम और बैंडविड्थ पर नियंत्रण तेजी से महत्वपूर्ण होगा। इलेक्ट्रॉनिक जवाबी उपाय (ईसीएम) और इलेक्ट्रॉनिक जवाबी-प्रति उपाय (ईसीसीएम) मजबूत रूप से सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नेटवर्क, काम करने का वातावरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा तकनीकों के अगले चरण को आकार देंगे। आने वाले दशक में कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता (एजीआई) भी एक प्रमुख कारक बनने की संभावना है।
