
कटनी। कटनी नगर निगम में नियम-कायदों की स्थिति क्या है, यह समझने के लिए बरगवां का एक कथित निर्माण ही काफी है। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही वाले इलाके में दो मंजिला व्यावसायिक इमारत लगभग तैयार हो गई और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी! अब सवाल यह है कि आखिर यह निर्माण निगम की नजर से बचकर कैसे चलता रहा?
कटनी-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरगवां स्थित आस्था प्लाजा के ठीक सामने चल रहे इस निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यहां व्यावसायिक भवन का निर्माण नगर निगम से नक्शा स्वीकृत कराए बिना और आवश्यक वैधानिक अनुमति लिए बिना कराया जा रहा है। निर्माण कार्य अब अंतिम दौर में बताया जा रहा है।
सड़क से गुजरते रहे साहब, बनती रही बिल्डिंग!
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि निर्माण स्थल कोई दूर-दराज का इलाका नहीं है। यह शहर के प्रमुख मार्ग पर स्थित है, जहां से नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों का प्रतिदिन आना-जाना होता है।
फिर सवाल उठता है—जब सड़क पर चलता व्यक्ति निर्माण देख सकता है, तो नगर निगम की निगरानी व्यवस्था को यह क्यों नहीं दिखा?
क्या निगम का अमला मौके पर पहुंचा?
क्या भवन की अनुमति जांची गई?
क्या नक्शा स्वीकृत है?
क्या निर्माण नियमों के अनुरूप है?
इन सवालों के जवाब फिलहाल कार्रवाई के इंतजार में हैं।
मौखिक शिकायत भी हुई, फिर भी ‘निर्माण जारी’!
स्थानीय लोगों के मुताबिक निर्माण को लेकर नगर निगम के जिम्मेदारों तक मौखिक शिकायत भी पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका। यदि शिकायत के बाद भी कोई निरीक्षण या कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उक्त निर्माण बरगवां स्थित गुरुनानक मोटर्स से जुड़े लोगों द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
रसूख का असर या सिस्टम की लापरवाही?
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कथित रूप से बिना अनुमति निर्माण का काम इतनी तेजी से कैसे आगे बढ़ गया? क्या यह केवल नगर निगम की निगरानी में लापरवाही का मामला है या फिर इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव अथवा संरक्षण है?
यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि अनुमति है तो निगम उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करता?
गरीब की झोपड़ी पर हथौड़ा, बड़े निर्माण पर खामोशी क्यों?
नगर निगम जब अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाता है तो अक्सर छोटे दुकानदारों और गरीबों के आशियानों पर कार्रवाई की तस्वीरें सामने आती हैं। ऐसे में जनता का सवाल जायज है कि नियम सबके लिए बराबर हैं या फिर कार्रवाई के लिए भी रसूख का पैमाना तय है?
यदि बरगवां का यह निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो निगम को बिना किसी दबाव के तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि निर्माण पूरी तरह वैध है तो संबंधित दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट कर जनता के सामने भ्रम दूर किया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि नगर निगम इस कथित निर्माण की जांच कर ‘नियमों का राज’ कायम करता है या फिर बिल्डिंग तैयार होने के बाद कार्रवाई की खानापूर्ति की जाती है।
