हाईकोर्ट के नोटिस के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, हिरन नदी बचाओ अभियान फिर ठंडे बस्ते में

सीधी: हाईकोर्ट जबलपुर में हिरन नदी में हो रहे अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी हुए महीनों बीत चुके हैं, फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सीमांकन के बाद करीब तीन दर्जन अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे और संबंधित लोगों को नोटिस भी जारी हुए, पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगल पीठ ने राज्य शासन, कलेक्टर सीधी, एसडीओ, तहसीलदार और सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों से जवाब तलब किया था। यह याचिका सीधी के समाजसेवी आदित्य नारायण सिंह द्वारा दायर की गई है, जिनकी ओर से अधिवक्ता सत्यप्रकाश मिश्रा ने पक्ष रखा।
नवभारत के हिरन नदी बचाओ अभियान के तहत नागरिक लगातार प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं। मई 2025 में प्रशासन ने सीमांकन कर अतिक्रमणों की पहचान की थी, लेकिन तहसील स्तर पर मामला उलझा दिया गया।बरसात में नदी के उफान से अतिक्रमण प्रभावित होते हैं, तब प्रशासन अस्थायी मदद करता है, पर स्थायी समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाता।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक दबाव और लापरवाही के चलते कार्रवाई रुकी हुई है।एसडीएम गोपदबनास राकेश शुक्ला ने कहा, हिरन नदी के चिन्हित अतिक्रमणों को प्राथमिकता से हटाया जाना चाहिए। हम तहसील कार्यालय से रिपोर्ट लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। मामला हाईकोर्ट में लंबित है, पर उससे पहले ही अतिक्रमण हटाना हमारी जिम्मेदारी है।

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