
सीधी । मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला सीधी अंतर्गत विकासखंड मझौली के एकीकृत कृषि संकुल क्रमांक-1, छूही में स्थापित संकुल स्तरीय संगठन गुलाब सागर के अंतर्गत आईएफएससी जैविक संसाधन केंद्र की स्थापना वर्ष 2025 में की गई। केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक कृषि के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उन्हें जैविक खेती की तकनीकों से प्रशिक्षित करना है। जैविक
संसाधन केंद्र में अग्निस्त्र, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र सहित विभिन्न जैविक कीटनाशक, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तथा जैविक संसाधनों से संबंधित अन्य उत्पाद तैयार कर विक्रय किए जाते हैं। केंद्र के माध्यम से अब तक आसपास के लगभग 250 किसानों को लाभान्वित किया जा चुका है। इनमें से 90 किसानों ने केंद्र पर जैविक खेती से संबंधित प्रशिक्षण
प्राप्त किया है। प्रशिक्षित किसानों द्वारा अपनी लगभग आधा-आधा एकड़ भूमि में जैविक खेती को अपनाया जा रहा है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में किसान फसलों में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने के साथ कीट नियंत्रण के लिए अग्निस्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं। जैविक संसाधन केंद्र की स्थापना से किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान हुआ है। पहले किसानों
को जैविक कीटनाशक स्वयं तैयार करने पड़ते थे, जिसके लिए समय और संसाधन की आवश्यकता होती थी। अब केंद्र पर जैविक कीटनाशक एवं खाद उपलब्ध होने से किसान इन्हें आसानी से स्थानीय स्तर पर खरीदकर उपयोग कर पा रहे हैं। केंद्र किसानों के लिए केवल बिक्री केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि सेवा प्रदाता के रूप में भी कार्य कर रहा है। केंद्र का संचालन प्रेमवती सिंह के सहयोग से किया जा रहा है।
64 हजार रुपये की जैविक उत्पादों की बिक्री
जैविक संसाधन केंद्र की गतिविधियों से किसानों को लाभ मिलने के साथ केंद्र भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष में अग्निस्त्र, ब्रह्मास्त्र सहित अन्य जैविक कीटनाशक एवं वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से लगभग 64 हजार रुपये का व्यवसाय किया गया है। इससे जैविक संसाधन केंद्र एक आत्मनिर्भर एवं सेवा आधारित संस्थान के रूप में विकसित हो रहा है।
