
इंदौर. ग्राहकों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना सिम एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को बेचने का मामला सामने आया है. ऐसी ही एक सिम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में दो साइबर ठगी की वारदातों में हुआ, जिनमें 16 लाख 60 हजार 991 रुपए की रकम ठगी गई.
गृह मंत्रालय के आई4सी पोर्टल और राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल से मिले संदिग्ध इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच ने पीओएस एजेंटों से जुड़ी सिम की जांच शुरू की थी. इसी दौरान दुधिया स्थित धर्मेंद्र मोबाइल शॉप के संचालक धर्मेंद्र अहिरवार की ओर से एक्टिवेट की गई सिम का मिलान एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज साइबर शिकायतों से किया. जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा एक्टिवेट की गई एक सिम से उत्तर प्रदेश में दो अलग अलग साइबर अपराध हुए हैं. इसके बाद क्राइम ब्रांच ने बाणगंगा क्षेत्र के शिवकंड नगर से धर्मेंद्र अहिरवार को गिरफ्तार किया, वह मूल रूप से गुना का रहने वाला है.
कमीशन लेकर साइबर अपराधियों को बेच देता था सिम
पूछताछ में सामने आया कि दुकान पर सिम लेने आने वाले ग्राहकों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक का इस्तेमाल कर वह उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त सिम एक्टिवेट करता था. इसके बाद इन सिम को कमीशन लेकर साइबर अपराधियों को बेच देता था. पुलिस अब उसके द्वारा एक्टिवेट की गई अन्य सिम का रिकॉर्ड खंगाल रही है. क्राइम ब्रांच यह भी पता लगा रही है कि इन सिम का इस्तेमाल देश के किन-किन राज्यों में साइबर अपराधों के लिए किया गया और इस नेटवर्क में उसके संपर्क किन लोगों से थे. मामले में एडिशनल डीसीपी, राजेश दंडोतिया ने बताया कि संदिग्ध सिम और साइबर शिकायतों के डेटा का मिलान कर कनेक्शन सामने आया है. अब आरोपी के पुराने सिम रिकॉर्ड और उनसे जुड़े मामलों की जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके.
