
शाजापुर, जब भी अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश होती है तो दबिश के बाद खबरों की तस्वीर और वीडियो एक चीज बिल्कुल फिक्स दिखाई देती है नीले ड्रम. आखिर अवैध शराब बनाने वाले व नीले ड्रम के पीछे फोटो खिंचाने वाले आबकारी और पुलिस का जन्मांतर का नाता है. अवैध शराब की दबिश के दौरान नीले ड्रम सरकारी ब्रांड एंबेसेडर बन गए हैं. लगता है आबकारी विभाग नीले ड्रम के बिना कार्रवाई नहीं करता है. आबकारी विभाग की किसी भी कार्रवाई की फोटो पूरी नहीं मानी जाती है जब तक चार पांच नीले ड्रम ना रखे हों. पुलिस आए ना आए लेकिन नीले ड्रम की मौजूदगी साबित कर देती है दबिश की पटकथा.
गौरतलब है कि साल 2021 में मुरैना में जहरीली शराब से 21 लोगों की मौत हुई थी उस समय भी शाजापुर आबकारी विभाग उन स्थानों पर कार्रवाई के लिए फोरन पहुंच गया था जहां अवैध शराब बन रही थी, वहीं आगे नीले ड्रम रखकर फोटो सेशन करवाया गया था. साल 2023 में भी कालापीपल में संदिग्ध चार लोगों की मौत के बाद यही नीले ड्रम वाली कार्रवाई देखने को मिली थी, अब हाल ही में सागर में जहरीली शराब के बाद शाजापुर आबकारी विभाग फिर नीले ड्रम के साथ फोटो सेशन कराने पहुंचा. लगता है शाजापुर आबकारी विभाग को जिले में कहां कहां अवैध शराब बन रही है उसकी कार्यसूची और जगह पहले से ही पता रहते हैं वे बस शायद किसी बड़ी घटना का इंतजार करते हैं ताकि वे सरकार को बता सके कि हमने भी कार्रवाई की है. जबकि हकीकत यह है कि ना तो पूरे साल आबकारी विभाग अवैध शराब पकडऩे के लिए कोई अभियान चलाता है और ना कोई ठोस कार्रवाई करता है.
नीले ड्रम तो मिल जाते हैं लेकिन आरोपी नहीं मिलते है
आबकारी विभाग और पुलिस की जब भी अवैध शराब को लेकर दबिश दी जाती है तो नीले ड्रम से शराब तो मिल जाती है लेकिन कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग और पुलिस को आरोपी नहीं मिलते हैं. सागर की घटना के बाद जिले में 7 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए लेकिन आरोपी कितने पकड़े इसकी कोई जानकारी नहीं. ऐसा लगता है कि कार्रवाई के लिए पहले से ही नीले ड्रम शराब माफिया रखकर भूमिगत हो जाते हैं ताकि आबकारी विभाग और पुलिस को नीले ड्रम के साथ फोटो सेशन का मौका मिल जाए.
