सागर। बंडा में जहरीली-अवैध शराब ने अब तक 30 लोगों की जान ले ली है। हैरानी की बात ये है कि ग्रामीणों ने एक साल पहले ही प्रशासन को आगाह कर दिया था। बंडा जनपद क्षेत्र की 25 पंचायतों ने ग्रामसभा में शराबबंदी का प्रस्ताव पारित कर अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन को ज्ञापन सौंपे थे, लेकिन इन चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं हुई।
अब बमूराभेड़ा, छापरी समेत कई गांवों में मातम पसरा है। एक ही मोहल्ले में पिता-पुत्र समेत कई लोगों की मौत हुई, जबकि कई मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।
जहरीली शराब कांड के बाद एसडीएम और एसडीओपी को हटा दिया गया है, लेकिन सवाल यही है—जब ग्रामीणों ने एक साल पहले चेताया था, तब प्रशासन क्यों सोता रहा?
