क्षेत्र में आचार्य नाम से पहचान बनाने वाले रतन सिंह सेंधव का होगा सार्वजनिक सम्मान

बागली। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस अवसर पर पिपरी सनातन विचार मंच द्वारा शिक्षक सम्मान के तहत क्षेत्र से जुड़े आचार्य रतन सिंह सेंधव का भी सम्मान किया जाएगा आचार्य रतन सिंह सेंधव द्वारा सन 1998 में 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उनके मन में जरूरतमंद बच्चों को नैतिक सामाजिक एवं देशभक्ति शिक्षा देने का विचार आया और उन्होंने देवास जाकर सनातन विचार मंच संस्था द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यों को नजदीक से देखा ओर यह पुनीत कार्य करने वाली संस्था के संस्थापक रविंद्र भारद्वाज से मुलाकात की भारद्वाज उस समय सेंट्रल एक्साइज विभाग में सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे । उनसे मिलकर रतन सिंह सेंधव ने
अपनी इच्छा जाहिर की मैं भी बच्चों को यह नैतिक शिक्षा का कार्य करवाना चाहता हूं मुझे अपने जीवन यापन के लिए अगर संस्था कुछ पारिश्रमिक दे तो मैं भी यह कार्य करने की चाहत रखता हूं समाजसेवी भारद्वाज ने कहा कि आदिवासी अंचल के गांव में यह कार्य करना पड़ेगा आपको ₹1500 मासीक आपके खर्च के लिए दिए जाएंगे आचार्य रतन सिंह सेंधव ने इस कार्य को स्वीकार किया शर्तों के अनुसार
6 घंटे के समय में तीन केंद्रो पर जाकर यह कार्य बच्चों के लिए करना होगा आचार्य सेंधों के मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा रही तो उन्होंने सभी शर्तों को स्वीकार किया और तभी(1998) से ही पोटला कन्डया राजस्व कन्डया फॉरेस्ट पर जाकर यह सेवा का कार्य कर रहे हैं । आचार्य सेंधव ने हमारे प्रतिनिधि सुनील योगी को बताया कि जब 1998 में जब इस क्षेत्र में आया तो मैं पहली बार में ही क्षेत्र के बोल बम कावड़ यात्रा मंडल के संयोजक गिरधर गुप्ता से मीला और उन्हें उद्देश्य बताया उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि मैं आपका हर तरह सहयोग करूंगा आप यह कार्यकरें मैंने तीनों चयनित केंद्र पर जाकर प्रारंभ किया अभी तक लगभग 1200से अधिक बच्चों को नैतिक देशभक्ति एवं सनातन से जुड़ी संस्कार आधारित सनातन संस्कृति की जानकारी दी जिसका उपयोग बच्चों को आगामी प्रतिस्पद्दा परीक्षाओं में भी मिला
वर्तमान में मेरे द्वारा पढ़ाए गए बच्चो मे कोई स्वास्थ्य विभाग में कोई पुलिस विभाग में कोई शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं ।और अपना परिवार चला रहे हैं। जब वह आकर मुझसे मिलते हैं और पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए अपनी कामयाबी बताते हैं। तो मुझे उन्हें देख कर हर्ष होता है।
मुझे अब संस्था वर्तमान में दस हजार रुपए पारीश्रमिक मिलता है। और सबसे बड़ा पारिश्रमिक यह की मुझे जो इस क्षेत्र में एक आचार्य जी के नाम से संबोधन मिलता है मैं वह पाकर बहुत खुश हूं मैं जब तक भी जीवित रहूं इस आदिवासी अंचल में बच्चों के लिए सेवा के कार्यकर्ता रहू शिक्षक दिवस पर सनातन सेवा समिति पिपरी द्वारा मुझे सम्मानित किए जाने का आमंत्रण मिला है में बहुत खुश हूं

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