महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
इन दिनों जबलपुर के प्रबुद्ध जनों के बीच उपलब्धियों और उपेक्षा से संदर्भित सवाल चर्चाओं के केंद्र में हैं। जबलपुर में नए विश्वविद्यालय की घोषणा भी ऐसे समय हुई जब मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन को लेकर पिछले कुछ महीने से सवाल खड़े हो रहे थे। कुछ एक संगठनों ने सवाल खड़े किए कि क्या मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की भरपाई नया विश्वविद्यालय कर पाएगा हालांकि राजनीतिक नेताओं, छात्र संगठनों की ओर से मुद्दे में चुप्पी साधी हुई है। शहर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के साथ कुछ ही संगठनों को छोड़ दें तो मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन का विरोध जबलपुर में किसी ने नहीं किया और न ही उसे जरूरी समझा।
कयास लगाए जा रहे थे कि विखंडन का उग्र विरोध होगा जिससे प्रदेश सरकार को अपने फैसले को बदलने के लिए सोचना पड़े लेकिन कद्दावर मंत्रियों सहित किसी विधायक ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन का विरोध नहीं किया जिसका नतीजा रहा कि मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी देश की सबसे छोटी यूनिवर्सिटी बनकर रह गई। जानकारों का एक बड़ा समूह तो शहर में स्पष्ट कहते भी आया है कि सब कुछ छीन कर एक छोटा सा लॉलीपॉप जबलपुर को थमा दिया गया है। अभी भी स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों को सियासी मौन हजम नहीं हो रहा। उधर मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के लगभग 300 आउटसोर्स कर्मचारी भी प्रदेश सरकार को कोस रहे हैं जिन्होंने सालों से यूनिवर्सिटी में अपनी सेवाएं दीं और अब इन सभी कर्मचारियों को उनके भविष्य की चिंता सता रही है क्योंकि उन्हें कोई स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है। विदित हो कि मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी को कमजोर करने का खेल आज बस नहीं खेला गया है इसके पहले भी यूनिवर्सिटी से नर्सिंग और पैरामेडिकल का दायित्व छीन लिया गया था जिसका कारण प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है और यह अपने आप में एक बड़ा सवाल अभी भी खड़ा हुआ है।
छलका तन्खा के दिल का दर्द
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट ने महाकौशल के साथ पूरे मध्य प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का नया बाजार सरगर्म कर दिया है। श्री तन्खा ने 1 सितम्बर को अपनी पोस्ट के माध्यम से राहुल गांधी के आगामी छात्रों की गूंज कार्यक्रम को इंदौर में आयोजित होने पर खुशी तो जताई लेकिन इस खुशी के पीछे उन्होंने यह भी याद दिला दिया कि इस कार्यक्रम को जबलपुर में आयोजित करने का विचार उन्होंने कांग्रेस की पीएसी बैठक में रखा था, मगर जीतू पटवारी जी का प्रेम इंदौर था। विदित रहे कि 12 सितंबर को आयोजित यह छात्र कार्यक्रम इंदौर में स्टेडियम ना मिल पाने की वजह से फिलहाल टल गया और अब 19 सितंबर को प्रस्तावित है।
उधर सोशल मीडिया में कार्यक्रम के स्थान को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग बातें होने लगीं हैं जिससे ध्वनित हो रहा है कि इस विषय को लेकर असंतोष का लेवल बढ़ रहा है। स्मरण रहे कि विवेक कृष्ण तन्खा पिछले लंबे समय से महाकौशल से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं, ऐसे में राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रम को जबलपुर में करने की उनकी इच्छा का सार्वजनिक रूप से उल्लेख करना अपने आप में अहम माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो तन्खा ने पोस्ट के माध्यम से जीतू पटवारी और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं को यह संकेत भी दे दिए हैं कि इतनी अनदेखी भी ठीक नहीं है। फिलहाल प्रदेश अथवा शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से अभी किसी ने कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं दी है, किन्तु पार्टी के भीतर खाने और व्हाट्सएप ग्रुपों में तन्खा की पोस्ट इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है।
