जीडीपी की बढ़ी दर आंकड़ों के खेल का परिणाम : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 03 सितंबर (वार्ता) कांग्रेस ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में जीडीपी की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर को आधार वर्ष में किए गए बड़े संशोधनों, कम डिफ्लेटर और पिछले वर्षों के आंकड़ों में करीब 43 लाख करोड़ रुपये की कटौती का परिणाम बताते हुए कहा कि यह आर्थिक विकास की वास्तविक तस्वीर नहीं, बल्कि आंकड़ों के साथ किए गए खेल का नतीजा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने गुरुवार को यहां एक बयान में बताया कि अप्रैल-जून 2025 तिमाही के जीडीपी आंकड़े चार बार संशोधित किए गए और करीब 86 लाख करोड़ रुपये के अनुमान को घटाकर लगभग 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 से पिछले चार वर्षों के आंकड़ों में भी इसी तरह संशोधन हुआ है और कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के अनुमानित आकार में करीब 43 लाख करोड़ रुपये की कमी की गई है।

श्री रमेश ने कहा कि पिछले वर्ष के आधार आंकड़े को नीचे करने से इस वर्ष की वृद्धि दर स्वाभाविक रूप से अधिक दिखाई देती है। उन्होंने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि आधार आंकड़े में यह बदलाव नहीं किया गया होता तो इस तिमाही की नाममात्र वृद्धि दर 10.3 प्रतिशत के बजाय करीब 2.6 प्रतिशत होती और महंगाई का प्रभाव हटाने के बाद वास्तविक वृद्धि लगभग शून्य रह जाती। कांग्रेस नेता ने विनिर्माण और निजी खपत के आंकड़ों को भी सरकार के दावे के विपरीत बताया और कहा कि श्री गर्ग के आकलन के अनुसार विनिर्माण जीवीए में 5.2 प्रतिशत और निजी खपत में 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती और लोगों की घटती क्रय शक्ति का भी उल्लेख किया।

श्री रमेश ने वित्त मंत्री से पूछा कि चार वर्षों के जीडीपी अनुमानों में कुल 43 लाख करोड़ रुपये की कमी क्यों की गई, नई पद्धति के किन घटकों से इतना बड़ा बदलाव आया और इसे तैयार करने की प्रक्रिया क्या थी। उन्होंने यह भी पूछा कि नई पद्धति तैयार करते समय किन लोगों से परामर्श किया गया तथा वास्तविक जीडीपी की गणना में महंगाई के प्रभाव को कम करने वाली अपस्फीति पद्धति अपनाने का आधार क्या है।

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