
झाबुआ। ईद-ए-मिलाद-उन-नबी इस्लाम धर्म के सबसे खास पर्वों में माना जाता है। यह पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्म का दिन है। यह पर्व इस्लामी चंद्र कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल में मनाया जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर स्थानीय हुसैनी चौक से मुस्लिम समाज द्वारा जुलूस निकाला जाएगा। इस मौके पर मुस्लिम क्षेत्रों में विद्युत साज-सज्जा कर स्वागत द्वार बनाए गए है। साथ ही डेकोरेशन सामग्री से गली-मोहल्लों को सजाया गया है। जगह-जगह इस्लामी झंडे लगाए गए है। 26 अगस्त, बुधवार को स्थानीय हुसैनी चौक से सुबह 8.30 बजे जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होकर निकलेगा।जगह-जगह विभिन्न कमेटियों एवं संस्थाओं द्वारा स्वागत-सत्कार का आयोजन किया जाएगा। जुलूस का समापन हुसैनी चौक पर होगा। जिसके बाद समाजजनों के सामूहिक भोज का आयोजन होगा। पर्व को लेकर समाजजनों में खुशी का माहौल है। इस दिन समाजजनों द्वारा एक-दूसरे को गले मिलकर ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देकर खुशी जाहिर की जाएगी।
*क्यों मनाया जाता है पर्व ? -*
इस्लामी परंपरा के अनुसार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिवस की याद में मनाई जाती है। उन्हें इस्लाम का अंतिम पैगंबर माना जाता है, जिन्होंने लोगों को एकेश्वरवाद, दया, न्याय, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया. इस दिन मुस्लिम समुदाय उनके जीवन (सीरत) और आदर्शों को याद करता है। इस पर्व को ईदों की ईद कहा जाता है।
*ईद-ए-मिलाद पर क्या किया जाता है ?* – इस दिन मुस्लिम समुदाय विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्य करता है। मस्जिदों में विशेष नमाज और दुआ की जाती है। कुरआन की तिलावत और पैगंबर मुहम्मद की सीरत पर तकरीरें आयोजित होती है। जुलूस और धार्मिक सभाएं निकाली जाती है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और दान दिया जाता है। समाजजन नए और साफ कपड़े पहनकर खुदा की इबादत करते है।
