नयी दिल्ली, 24 जुलाई (वार्ता) राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल तेली की हत्या पर बनी हिंदी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ पर अंतरिम रोक जारी रहनी चाहिए या नहीं, उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर शुक्रवार को संक्षिप्त सुनवाई के बाद आदेश पारित करेगा।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार को संबंधित पक्षों की दलीलें विस्तार पूर्वक सुनने के बाद कहा कि कल इस मामले का निपटारा किया जायेगा।
फिल्म के निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया के फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने में हो रही देरी का विरोध पर पीठ ने कहा, “आपने सही इंतज़ार किया है, क्योंकि कानून यही चाहता है। मुद्दा यह है कि क्या अंतरिम रोक जारी रहनी चाहिए?”
पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति कांत ने कहा , “हम कल 10-15 मिनट और लेंगे और मामले का निपटारा कर देंगे।”
शीर्ष अदालत के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता,जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, कन्हैया लाल हत्याकांड के एक आरोपी मोहम्मद जावेद का प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दलीलें पेश कीं।
केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए श्री मेहता ने कहा कि फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ एक खास अपराध से संबंधित है और यह किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कहा कि फिल्म इस तरह बनाई गई है कि यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ ज़हर उगलती है।
कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपी मोहम्मद जावेद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी कहा कि यह फिल्म उनके मुवक्किल के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
पीठ ने केन्द्र सरकार की ओर से गठित जांच समिति के फिल्म में बदलाव की सिफारिश के बाद 21 जुलाई को आगे की सुनवाई गुरुवार के लिए स्थगित कर दी थी।
पीठ ने संबंधित पक्षकारों से कहा था कि वे अगली सुनवाई गुरुवार से पहले समिति के फैसले पर अपनी आपत्तियां (यदि कोई हो) दर्ज करा सकते हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने 17 जुलाई को उदयपुर फाइल्स फिल्म देखी। इससे पहले उसने 16 जुलाई को पीड़ित पक्षों की बात सुनी थी।
शीर्ष अदालत ने 16 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतरिम रोक संबंधी आदेश में फिलहाल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार निर्देशानुसार (दिल्ली उच्च न्यायालय के) फिल्म की जांच कर सकती है और तब तक ये मामला (संबंधित याचिकाओं पर कोई सुनवाई) लंबित रहेगा।
गौरतलब है कि यह फिल्म 11 जुलाई से प्रदर्शित होने वाली थी, लेकिन उससे पहले 10 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अदालत ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद रोक संबंधी आदेश पारित किया था। इस रोक संबंधी के आदेश को फिल्म निर्माता कंपनी ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।
दूसरी ओर, कन्हैया लाल हत्याकांड के आरोपियों में शामिल मोहम्मद जावेद ने फिल्म पर रोक लगाने की गुहार लगाते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
