
ज़ी स्टूडियोज़ की रणनीति अलग-अलग क्षेत्रों के दर्शकों की पसंद और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। स्टूडियो का जोर ऐसी कहानियों पर है, जो अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ी हों, लेकिन भाषाई सीमाओं से आगे जाकर व्यापक दर्शक वर्ग से जुड़ सकें।
हिंदी सिनेमा में स्टूडियो की आगामी फिल्मों में ‘बाप’, ‘रामभूमि’, ‘दिल्ली 2021’ और ‘ब्लाइंड बाबू’ शामिल हैं। इन फिल्मों के जरिए बड़े पैमाने के मनोरंजन के साथ एक्शन, सस्पेंस और आधुनिक कहानी कहने के अंदाज को पेश करने की तैयारी है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी ज़ी स्टूडियोज़ ने अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। तेलुगु में ‘इंद्रपुत्र’, ‘एनबीके111’, ‘कनका दुर्गा’ और ‘अनसूया जनरल स्टोर्स’, कन्नड़ में ‘अन्ना फ्रॉम मेक्सिको’ तथा तमिल में ‘हाई’ और ‘सत्यवान सावित्री’ जैसी फिल्में स्लेट का हिस्सा हैं। स्टूडियो ने ‘टॉम एंड चेरी’ के साथ गुजराती सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
मराठी सिनेमा भी इस रणनीति का अहम हिस्सा है। ‘आत्मपैम्फलेट’ को राष्ट्रीय पुरस्कारों में मिली सराहना के बाद स्टूडियो की नई स्लेट में ‘झेप’, ‘फुलवारा’, ‘मान’ और ‘जोगाई’ जैसी फिल्मों को शामिल किया गया है। ज़ी स्टूडियोज़ की आगामी फिल्मों में जॉनर की विविधता भी दिखाई देती है। ‘बाप’ और ‘सिला’ बड़े पैमाने के कमर्शियल एक्शन एंटरटेनमेंट को सामने लाएंगी, जबकि ‘ब्लाइंड गेम’, ‘ब्लाइंड बाबू’ और ‘दिल्ली 2021’ में मनोवैज्ञानिक और थ्रिलर तत्व देखने को मिलेंगे। ‘इंद्रपुत्र’ और ‘रामभूमि’ के जरिए भारतीय माइथोलॉजी और इतिहास से प्रेरित सिनेमाई संसार को प्रस्तुत करने की तैयारी है।
ज़ी स्टूडियोज़ के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत को सिर्फ एक भाषा, एक कहानी या एक सिनेमाई नजरिए से नहीं समझा जा सकता। प्रत्येक बाजार की अपनी ऑडियंस, प्रतिभा और मनोरंजन की पसंद है। स्टूडियो का उद्देश्य हिंदी, मराठी, मलयालम, गुजराती, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और अन्य भाषाओं में विविध कहानियों के जरिए एक मजबूत कंटेंट इकोसिस्टम तैयार करना है, जो भारत के साथ-साथ देश के बाहर के दर्शकों से भी जुड़ सके। ‘टॉम एंड चेरी’, ‘हाई’, ‘सत्यवान सावित्री’, ‘अन्ना फ्रॉम मेक्सिको’, ‘झेप’, ‘फुलवारा’, ‘जोगाई’, ‘कनका दुर्गा’ और ‘अनसूया जनरल स्टोर्स’ जैसी फिल्में स्टूडियो की क्षेत्रीय और भाषाई पहुंच को और विस्तार देती हैं।
ज़ी स्टूडियोज़ की यह स्लेट स्टार-ड्रिवन कमर्शियल फिल्मों से लेकर हाई-कॉन्सेप्ट और स्थानीय जड़ों से जुड़ी कहानियों तक फैली हुई है। स्टूडियो का लक्ष्य अलग-अलग भारतीय भाषाओं, संस्कृतियों और दर्शक वर्गों को ध्यान में रखते हुए ऐसी फिल्मों को सामने लाना है, जो मनोरंजन के साथ व्यापक स्तर पर दर्शकों से जुड़ सकें।
