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कुछ एहसास कहे नहीं जाते, बस महसूस किए जाते हैं… मां के हाथों का सुकून, पिता की खामोश चिंता, दोस्त का बिना कहे साथ, किसी अपने की आवाज में छिपा अपनापन या बचपन की कोई मीठी याद—जिंदगी ऐसे ही अनगिनत एहसासों से खूबसूरत बनती है।
सुरुचि के नए कॉलम ‘अपनेपन का एहसास’ के लिए आमंत्रित हैं आपकी कलम से निकली सच्ची, संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली कहानियां, संस्मरण और जीवन के अनुभव। अपने किसी खास रिश्ते, याद, खुशी, दर्द, उम्मीद या सुकून से जुड़ा अनुभव हमारे साथ साझा करें।
खोलिए यादों की गठरी, महसूस कीजिए दिल की बात और लिख भेजिए अपनी कहानी—क्योंकि कुछ एहसास सिर्फ महसूस करने के लिए नहीं, बांटने के लिए भी होते हैं।
अपनी रचना के साथ नाम, शहर और संक्षिप्त परिचय अवश्य भेजें। चयनित रचनाओं को सुरुचि के आगामी अंक में स्थान दिया जाएगा।
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