रीवा में बाढ़ प्राकृतिक पूर्णत कृतिम बाढ़ है: शर्मा

रीवा, रीवा शहर सहित सम्पूर्ण जिला कुछ घन्टों की बारिश से जल मग्न हो गया, लोगों को भीषण तबाही का सामना करना पड़ा, जहां कभी बाढ़ नही थी, वहां भी भीषण जल भराव के कारण तबाही देखने को मिली. रीवा शहर मे आई बाढ़ प्राकृतिक न होकर पूर्णत: कृतिम एवं प्रदेशर सरकार के सुनियोजित पैसा कमाने की भावना से ग्रसित विकास का परिणाम है, यह बातें जिला कांग्रेस कार्यालय रीवा मे पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा ने कही.

श्री शर्मा ने कहा कि रीवा शहर का बांस घाट, झिरिया, पचमठा, घोघर, निपनिया, पुष्पराज नगर, बिछिया, महाजन टोला, गुलाब नगर, बाणसागर कालोनी बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित रहा, साथ ही रीवा से लगे आस-पास ग्रामीण क्षेत्र तथा त्योंथर, मनगवॉ, सेमरिया, सिरमौर विधानसभा का तराई अंचल एवं जवा तहसील के अधिकांश ग्राम बाढ़ प्रभावित रहें. श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि नदी की चौड़ाई एवं नये पुलों की चौड़ाई को सकरी कर दिया गया है, नालों मे अतिक्रमण कर घर बना दिये गये हैं, पूरे नये शहर मे अवैध कालोनियों का जाल है, इन कालोनियों मे पानी निकासी की कोई व्यवस्था प्रशासन द्वारा नही की गई, रिंग रोड स्टॉप डैम का काम कर रही है. जिसके कारण पहली बार गड्डी रोड मे पानी भराव के कारण खौर, कोठी, भटलों आदि ग्राम बाढ़ से प्रभावित हुये हैं. त्योंथर मे मेन्टेना कम्पनी की नहर ने दो हजार लोगों को तबाह कर दिया, उन्होने बताया कि कांग्रेस पार्टी संगठन के माध्यम से बाढ़ प्रभावितों के नुकशानी का आंकलन करा रही है, रिपोर्ट प्राप्त होते ही जिला कलेक्टर से मिल कर राहत पैकेज की प्रदेश सरकार से मांग करेगें.

मुख्यमंत्री का मिला आश्वासन, धरातल पर कार्य नही: विधायक अभय

सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के रीवा आगमन पर पूरे जिले की बाढ़ विभीषिका से हुई नुकशानी की ओर ध्यान आकृष्ट किया था, किन्तु अफसोस है कि वह केवल वीडियों कांफ्रेसिंग एवं मात्र एक वार्ड मे भ्रमण कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर दी. प्रदेश के मुख्यमंत्री का मात्र आश्वासन मिला, धरातल पर उतारने का आज दिनांक तक कोई कार्य नही हुआ.

अदूरदर्शी निर्णय के कारण आई बाढ़: महापौर

रीवा महापौर अजय मिश्र बाबा ने कहा कि विकास के नाम पर अदूरदर्शी निर्णय के कारण बाढ़ का ताण्डव देखने को मिला है, उन्होने आरोप लगाया कि अवैध कालोनियों की बसाहट एवं नालों को पाट कर भवन बनाने वालों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई, बल्कि उन्हे अनैतिक कार्य करने की खुली छूट दी गई, इस कारण पूरे शहर के लोग बाढ़ की चपेट मे आये हैं. गुलाब नगर सहित अन्य नवीन बस्तियां जो भीषण जल भराव के कारण बाढ़ की चपेट मे आई हैं उनके लिये पूर्णत: जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया तथा आरोप लगाया कि मेरे प्रस्ताव पर प्रशासन ने कोई ध्यान नही दिया.

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