अब पीएचडी के लिए मास्टर डिग्री की जरूरत नहीं, स्नातक के बाद करें पीएचडी

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (वार्ता) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) पूरा करने वाले छात्रों के लिए बिना मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी में दाखिला का रास्ता खोल दिया है, जिससे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए योग्य छात्र सीधे आवेदन कर सकेंगे।

यह नियम 2026-27 अकादमिक सत्र के लिए एक खास उपाय के तौर पर लागू होगा। यह उन छात्रों के लिए है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्नातक पाठ्यचर्या रूपरेखा (यूजीसीएफ) 2022 के तहत विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए पहले चार साल के अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम को पूरा कर रहे हैं।

संशोधित नियमों के तहत जो छात्र कम से कम 7.5 क्युमुलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज (सीजीपीए) के साथ चौथा साल पूरा करेंगे, वे सीधे पीएचडी कार्यक्रम के लिए आवेदन करने के योग्य होंगे। अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी के छात्रों के लिए योग्यता की सीमा 7.0 सीजीपीए तय की गई है, जो विश्वविद्यालय के दाखिला नियमों के अधीन होगी।

डीयू ने बताया कि पहले एफवाईयूपी बैच में 75,948 छात्र शामिल थे, जिन्हें 2022-23 अकादमिक सत्र में दाखिला मिला था। इनमें से 40,005 छात्रों ने तीन साल पूरे किए और 2025 में अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम छोड़ दिया, जबकि 35,943 छात्रों ने चौथे साल में पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुना। इन आंकड़ों में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के जरिए नामांकित हुए छात्र भी शामिल हैं।

विश्वविद्यालय ने कहा कि चौथा साल शोध, उद्यमिता और अकादमिक रूप से मजबूत पढ़ाई पर अधिक जोर देने के लिए डिजाइन किया गया है, साथ ही अंडरग्रेजुएट शिक्षा को वैश्विक डिग्री ढांचे के करीब लाया गया है।

 

 

Next Post

राहुल की न्याय की मांग को रोकना छात्रों के साथ अन्याय- वेणुगोपाल

Fri Aug 21 , 2026
नयी दिल्ली, 21 अगस्त (वार्ता) कांग्रेस महासचिव(संगठन) केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृहमंत्री को छात्रों की पीड़ा की कोई चिंता नहीं है और नेता विपक्ष राहुल गांधी जब छात्रों के न्याय के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, तब उनकी […]

You May Like