
उन्होंने यूपीआई – पे नाउ लेनदेन में वृद्धि, सिंगापुर में भारतीय जेनेरिक दवाओं के पंजीकरण के पायलट प्रोजेक्ट, भारतीय लीची, आम, चेरी और बेर के निर्यात, प्रसंस्कृत पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात के लिए मंजूरी, चेन्नई में राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्र के विकास, चौथे सिंगापुर-भारत हैकाथॉन, सेमीकंडक्टर के लिए आगामी ग्रीन लेन पहल, हरित हाइड्रोजन आपूर्ति श्रृंखला और बेंगलुरु में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के कार्यालय के खुलने सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने खाद्य सुरक्षा सहयोग, समुद्री विरासत सहयोग तथा दूरसंचार और प्रसारण क्षेत्र में नियामकीय सूचना के आदान-प्रदान से संबंधित दो समझौता ज्ञापनों और एक आशय पत्र का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों ने भारतीय राज्यों और सिंगापुर के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई, जिसमें भारत के मुख्यमंत्रियों की सिंगापुर की नियमित यात्राएं शामिल हैं।
भारतीय मंत्रियों ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परिवहन मंत्री और वित्त राज्य मंत्री जेफ्री सिओ से मुलाकात की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंगापुर के मंत्रियों के. षणमुगम और विवियन बालाकृष्णन के साथ बैठकें कीं और श्री बालाकृष्णन के साथ सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी-सह-आवासीय भवन परिसर की आधारशिला रखी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-सिंगापुर बिजनेस फोरम को संबोधित किया और संभावित निवेशकों तथा उद्योग भागीदारों के साथ बैठकें कीं, जबकि राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के हितधारकों के साथ बातचीत की।
इस अवसर पर सेमीकंडक्टर उद्योग गोलमेज बैठक भी आयोजित की गई। मंत्रियों ने चौथी भारत-सिंगापुर बिजनेस राउंडटेबल की रिपोर्ट भी साझा की। गोलमेज बैठक तंत्र भारत-सिंगापुर संबंधों की बहुआयामी और भविष्य उन्मुख प्रकृति को दर्शाता है। सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया गया था और सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री वोंग की भारत यात्रा के दौरान इसके रोडमैप को अपनाया गया था।
