एआरओ पांडे के घर मिली सोने की ईंट, 4.60 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति

इंदौर. नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के घर और छात्रावास पर लोकायुक्त की सर्च में सोने की ईंट मिलने की जानकारी सामने आई है. तलाशी में अब तक 80 लाख रुपए की आय के मुकाबले 4 करोड़ 59 लाख 87 हजार 491 रुपए का अनुपातहीन व्यय पाया गया है. यह कुल आय का 474.84 प्रतिशत है. इसके अलावा 60.48 लाख रुपए के सोने के आभूषण, 4.07 लाख रुपए की चांदी और करीब 1.13 करोड़ रुपए कीमत की दो कृषि जमीन भी मिली हैं.

लोकायुक्त की जांच में पांडेय के घर से 60 लाख 23 हजार 110 रुपए के घरेलू सामान की सूची तैयार की है. वहीं सोने के आभूषणों का मूल्य 60 लाख 48 हजार 653 रुपए और चांदी के आभूषणों का मूल्य 4 लाख 7 हजार 392 रुपए आंका है. तलाशी में 2 लाख 33 हजार 20 रुपए नकद मिले हैं, जबकि बैंक खातों में 7 लाख 32 हजार 616 रुपए का बैलेंस पाया. जांच में भूमि और भवन निर्माण पर 1.20 करोड़ रुपए खर्च होने का आकलन है. इसके अलावा पत्नी के नाम छात्रावास पर 91.50 लाख रुपए खर्च और वहां रखे सामान की कीमत 1 लाख 6 हजार 700 रुपए आंकी गई है.

लोकायुक्त को ग्राम मुंडला दोस्दार, तहसील बिचौली हप्सी में 1.279 हेक्टेयर कृषि भूमि मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत 81.86 लाख रुपए बताई गई है. इसी क्षेत्र में मुख्य मार्ग से लगी 13,500 वर्गफीट कृषि भूमि की अनुमानित कीमत 31 लाख रुपए आंकी गई है. लोकायुक्त द्वारा दी गई अधिकृत जानकारी के अनुसार अभी तक की सर्च में सामने आए इन सभी संपत्ति और व्यय के आंकड़ों को जोड़ने पर 4,59,87,491 रुपए का अनुपातहीन व्यय सामने आया है. यह पांडेय की अनुमानित 80 लाख रुपए की आय की तुलना में 474.84 प्रतिशत है. संपत्तियों और दस्तावेजों का सत्यापन आगे भी जारी है. पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त इंदौर, राजेश सहाय ने नव भारत को बताया कि अभी तक की जांच में करीब 80 लाख रुपए की आय की तुलना में 4,59,87,491 रुपए का अनुपातहीन व्यय पाया गया है, यह 474.84 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति है. सर्च में मिली संपत्तियों और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है.

नामांतरण घोटाले में पहले भी निलंबित हुआ था पांडेय…

जितेंद्र कुमार पांडेय पूर्व में नगर निगम के नामांतरण घोटाले में निलंबित हो चुका है. जोन 3 में पदस्थ रहते हुए शिवविलास पैलेस के पास एक मकान का फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर नामांतरण किए जाने का मामला सामने आया था. मकान मालिक मुंबई में रहता था और इंदौर आने पर संपत्ति कर जमा करता था. निगम पहुंचने पर उसे पता चला कि संपत्ति उसके नाम पर नहीं है. जांच में फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर नामांतरण की पुष्टि के बाद पांडेय को निलंबित किया था. बाद में वह नेहरू स्टेडियम का प्रभारी रहा और संगम नगर तथा जोन 6 सुभाष नगर में सहायक राजस्व अधिकारी के रूप में पदस्थ रहा.

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