
झाबुआ। सावन मास के दूसरे सोमवार को शिवगंगा समग्र ग्राम विकास परिषद् झाबुआ द्वारा ‘मेरा गांव, मेरा तीर्थ, संपूर्ण समृद्धिशाली गांव’ के संकल्प के साथ कावड़ यात्रा का आयोजन किया गया। प्राचीन तीर्थ स्थल देवझिरी से शुरू हुई यात्रा ढोल-मांदल की थाप और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के साथ झाबुआ शहर पहुंची।
कावड़ यात्रा झाबुआ अंचल के प्राचीन तीर्थ स्थल देवझरी से प्रारंभ होकर झाबुआ नगर पहुंची। पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल और मांदर की थाप पर थिरकते कावड़ यात्रियों तथा ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। शहरवासियों द्वारा कावड़ यात्रियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। यात्रा का समापन झाबुआ के अंबा पैलेस में हुआ, जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा को सामाजिक कार्यकर्ता रेमू वाखला, विक्रम गरवाल, बहादुरभाई डामोर एवं राजाराम कटारा ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान शिव आदिवासी समाज के आदि देव हैं। सावन का पवित्र माह देशभर में भगवान शिव की आराधना, उपासना और जलाभिषेक का विशेष पर्व है। झाबुआ अंचल में भी सावन मास के दौरान जातर उत्सव सहित विभिन्न लोक परंपराओं के माध्यम से भोलेश्वर की स्तुति और आराधना की जाती है। वक्ताओं ने कहा कि शिवगंगा पिछले 26 वर्षों से सामाजिक जागरण और ग्राम समाज की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रहीं है। इन 26 वर्षों की यात्रा में हिंदू संगम, 123 गांवों में शिवलिंगों की स्थापना, 900 गांवों में 900 वाचनालय, माही से नर्मदा पदयात्रा सहित अनेक प्रयासों के माध्यम से ग्राम विकास की एक नई दृष्टि विकसित हुई है। शिवगंगा द्वारा समग्र ग्राम विकास के लिए 17 प्रकार के विकास आयामों को केंद्र में रखकर कार्य किया जा रहा है। जल, जंगल, जमीन, जानवर, जन और नव विज्ञान के संवर्धन के माध्यम से ग्राम समाज में समृद्धि लाने की दिशा में झाबुआ का समाज निरंतर आगे बढ़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि ‘मेरा गाँव, मेरा तीर्थ’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अपने गांव को ही अपनी आस्था, सेवा, विकास और समृद्धि का केंद्र बनाने का संकल्प है। पवित्र श्रावण मास में आयोजित इस कावड़ यात्रा के माध्यम से प्रत्येक कावड़ यात्री ने संकल्प लिया कि वह अपने गांव को संपूर्ण समृद्धिशाली गांव बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेगा।
*खिचड़ी एवं फलाहार का प्रसाद वितरित हुआ -* धर्मसभा के समापन के पश्चात सभी कावड़ यात्रियों को खिचड़ी एवं फलाहारी प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद सभी कावड़ यात्री अपने-अपने गाँवों के लिए रवाना हुए, जहां स्थापित शिवलिंगों पर जलाभिषेक किया जाएगा तथा भजन-कीर्तन एवं प्रसादी का आयोजन किया जाएगा। मेरा गांव मेरा तीर्थ के संकल्प के साथ समाज जागरण की यात्रा (कावड़ यात्रा) देवझिरी से जल भर कर झाबुआ अंबा पैलेस में समापन के बाद अपने अपने गांव की ओर प्रस्थान हुई।
